'बुलेट ट्रेन छोड़िए पहले बुनियादी ढांचा ठीक करें'

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उत्तर प्रदेश में कानपुर के पास रविवार को इंदौर-पटना एक्सप्रेस के 14 डिब्बे पटरी से उतर गए. इसकी वजह से मरने वालों की संख्या 142 हो गई है और 180 लोग घायल हुए हैं.

रेलवे बोर्ड के पूर्व सदस्य रह चुके आदित्य प्रकाश मिश्रा ने बीबीसी को बताया कि भारतीय रेल के बुनियादी ढांचे को ठीक करने की ज़रूरत है.

ट्रेन के पटरी से उतरने की वजहों और इससे जुड़े दूसरे तकनीकी पक्षों के बारे में रेलवे बोर्ड के पूर्व सदस्य आदित्य प्रकाश मिश्रा की राय-

"भारत में पटरी से उतरने की वजह से होने वाले रेल हादसों का इतिहास कोई नया नहीं है. ट्रेन के पटरी पर से उतरने के चार मुख्य कारण हो सकते हैं.

पहला- सामने किसी अवरोध के आने के कारण ट्रेन पटरी पर से उतर सकती है. कई बार ऐसा होता है कि कोई मवेशी या बड़ा जानवर अचानक से पटरी पर आ जाता है तो ट्रेन पटरी पर से उतर जाती है.

दूसरा- इंजन का कोई हिस्सा या पार्ट अगर गिर जाए और उस पर ट्रेन चढ़ जाए तो ऐसी स्थिति में भी पटरी पर से ट्रेन उतर सकती है.

तीसरा- पटरी के टूटे होने की स्थिति में भी ट्रेन पटरी पर से उतर सकती है. लेकिन ऐसी स्थिति में इंजन के साथ ट्रेन उतरती है. कानपुर के पास जो हादसा हुआ है उसमें इंजन पटरी पर से नहीं उतरा है.

कभी-कभी यह भी हो सकता है कि इंजन के निकलने के बाद पटरी के बीच का गैप बढ़े और तब पीछे के डिब्बे पटरी पर से उतर जाएं.

चौथा- कई बार किसी-किसी इलाके में उपद्रवी और ग़ैर सामाजिक तत्वों के तोड़-फोड़ करने के कारण भी ट्रेन पटरी पर से उतर जाती है.

जहां तक बुलेट ट्रेन चलाए जाने की बात है तो उसकी पटरी को बिछाने का खर्चा बहुत महंगा पड़ता है. पांच सौ किलोमीटर पटरी बिछाने का खर्चा एक लाख करोड़ पड़ता है.

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अभी तो भारत में जो मौजूदा लाइनें हैं, हम उन्हीं की सुरक्षा पर पूरा खर्चा नहीं कर पा रहे हैं.

ऐसे हालात में या तो कोई देश आकर भारत में पटरी बिछा दे या आर्थिक रूप से मदद हो तभी ये संभव है.

भारतीय रेलवे के लिए तो इतना खर्चा उठाना अभी संभव नहीं है. मेरी राय में जो बुनियादी ढांचा अभी हमारे पास है, पहले उसी पर ध्यान देना चाहिए.

कानपुर के पास जो हादसा हुआ है उसमें मानवीय चूक होने की संभावना नहीं लगती है. जो चार तकनीकी वजहें मैंने अभी बताई है इनकी संभावना ही ज्यादा लगती है. "

(रेलवे बोर्ड के पूर्व सदस्य रह चुके आदित्य प्रकाश मिश्रा से बीबीसी संवाददाता संदीप सोनी की बातचीत पर आधारित)

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