'मां नहीं रही, अब कभी कानपुर नहीं जाऊंगा'

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जिन यात्रियों ने कानपुर के नज़दीक हुए भयानक रेल हादसे को महसूस किया, वो घबराए और झुंझलाए हुए हैं और उस खौफ़नाक मंजर को भुला नहीं पा रहे हैं.

सोमवार सुबह लगभग चार बजे इंदौर-पटना इंटरसिटी एक्सप्रेस में सवार रहे यात्रियों से खचाखच भरी विशेष ट्रेन पटना पहुंची तो इन मुसाफ़िरों ने अपने अनुभव बयां किए.

यात्रियों के चेहरे पर थकान नहीं, बल्कि डर दिख रहा था. डर उस वाकये का, जिसने कई लोगों की ज़िंदगी हमेशा के लिए बदल दी.

रेल विभाग के पीआरओ (नॉर्दर्न सेंट्रल) अमित मालवीय ने स्थानीय पत्रकार रोहित घोष को बताया कि अब तक 142 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि घायलों की संख्या 180 है.

रविवार रात तक 133 शव निकाले जा चुके थे और सोमवार को नौ और शव मिले.

छपरा के विनोद साह पटना आ रहे थे. इस हादसे में उनके पैर और बांह में चोट आई, लेकिन उनके असली दुख के सामने ये चोटें कुछ भी नहीं. दुर्घटना में उन्होंने अपनी मां कांति देवी को खो दिया है.

विनोद ने आंसू रोकने की कोशिश करते हुए बीबीसी को बताया, "मैं और मां एस-3 कोच में थे. वो अब नहीं रहीं. जिसके साथ ऐसा हादसा हुआ हो़ वो कभी कानपुर की तरफ देखेगा तक नहीं."

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Image caption रेल में सवार यात्रियों के बैग और दूसरे सामान

सीतामढ़ी में रहने वाले आनंद महतो ट्रेन में उज्जैन से सवार हुए थे. उनके अनुसार इस सफ़र की शुरुआत ही गड़बड़ से हुई थी. उन्होंने बताया, "उज्जैन से गाड़ी के खुलने के बाद ही एक भैंस कट गई थी."

महतो ने कहा, "फिर कानपुर से 60 किलोमीटर पहले सुबह के तीन बजे यह हादसा हुआ. दो बोगियों का तो पता ही नहीं चल पा रहा था. यह समझ लीजिए कि हम लोग मौत के कुएं से बचकर आ रहे हैं."

ट्रेन के हादसे के एक और गवाह बांका के रिज़वान अपने परिवार के सात सदस्यों के साथ ट्रेन के एस-5 कोच में सवार थे.

रिज़वान बताते हैं कि दुर्घटना के बाद उनका कोच आधा पटरी पर, तो आधा खेत में था.

उन्होंने कहा, "एकाएक भूकंप जैसा लगा. गेट नहीं खुल रहा था तो खिड़की से बाहर निकले."

रिज़वान ने कहा, "वहां हाहाकार मचा हुआ था. कई लोगों की लाशें पड़ी हुई थीं. रोना-चिल्लाना मचा हुआ था. हम सरकारी बस से कानपुर आए और अब पटना पहुंचे हैं."

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दानापुर की अंजनी सिंह भी यही बात कहती हैं. खुद को खुशनसीब मानती हैं कि वो और उनकी मां इस हादसे में बच गए.

विशेष ट्रेन से पटना जंक्शन पहुंचे यात्रियों की सुविधा के लिए ज़िला और रेल प्रशासन समेत राज्य आपदा राहत बल ने भी यात्रियों की सुविधा के लिए कई इंतज़ाम कर रखे थे.

लेकिन इस दर्दनाक हादसे ने यह साबित कर दिया है कि रेल परिचालन को दुरुस्त करने और यात्रियों को सुरक्षित सफ़र मुहैया कराने के लिए रेल प्रशासन के लिए ऐसी चुनौती है, जिससे निपटना आसान नहीं.

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