बुलेट ट्रेन नहीं पहले सुरक्षित ट्रेन चाहिए!

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Image caption (फ़ाइल फ़ोटो)

आंध्रप्रदेश के विजयनगरम ज़िले के कुनेर स्टेशन के पास हीराखंड एक्सप्रेस के आठ डिब्बे पटरी से उतर गए हैं. ये तीन महीनों में इस तरह का तीसरा बड़ा रेल हादसा है. हादसे में अब तक 36 लोगों के मारे जाने की ख़बर है.

इसके पहले बीते साल नवंबर में उत्तर प्रदेश के कानपुर के पास इंदौर-पटना एक्सप्रेस के 14 डिब्बे पटरी से उतर गए. इस हादसे में तक़रीबन 150 लोगों की मौत हो गई थी और लगभग 180 लोग घायल हुए थे.

आख़िर बार बार रेल हादसे क्यों हो रहे हैं?

हीराखंड रेल हादसे में मरने वालों की संख्या 2736

भारत में अब तक हुए बड़े रेल हादसे

कानपुर के पास क्यों हो रहे हैं रेल हादसे?

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इस मुद्दे पर बीबीसी से बात करते हुए रेलवे बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष प्रकाश नारायणन ने कहा, "केंद्र सरकार रेलवे को उसके आधुनिकीकरण करने और आर्थिक रूप से लाभदायक नहीं रहने वाली सेवाओं और रूटों के लिए अलग से पैसे दे."

उन्होंने कहा, "रेल हादसों की मुख्य वजह इसका पुराना सिस्टम है, जिसे पूरी तरह ठीक करने और व्यापक पैमाने पर आधुनिकीकरण किए जाने की ज़रूरत है. रेलवे के लिए यह मुमकिन नहीं है कि वह अपने पैसे से यह काम करे. लिहाजा, उसे अलग से पैसे मिलने चाहिए."

उन्होंने इसके आगे जोड़ा, "रेल ट्रैक और इसकी पूरी प्रणाली के परीक्षण और निगरानी की व्यवस्था नहीं है. इसका इंतजाम तुरंत हो. इसके अलावा आंतरिक प्रणाली ऐसी दुरुस्त हो कि हादसे का पता तुरंत लग जाए ताकि उससे होने वाले नुक़सान को कम किया जा सके. फ़िलहाल ये दोनों ही व्यवस्थाएं ठीक नहीं है."

रेलवे बोर्ड के पूर्व सदस्य आदित्य प्रकाश मिश्रा ने बीबीसी को बताया कि भारतीय रेल के बुनियादी ढांचे को ठीक करने की ज़रूरत है.

बीते साल नवंबर में हुए रेल हादसे के बाद ट्रेन के पटरी से उतरने की वजहों और इससे जुड़े दूसरे तकनीकी पक्षों के बारे में रेलवे बोर्ड के पूर्व सदस्य आदित्य प्रकाश मिश्रा की राय-

"भारत में पटरी से उतरने की वजह से होने वाले रेल हादसों का इतिहास कोई नया नहीं है. ट्रेन के पटरी पर से उतरने के चार मुख्य कारण हो सकते हैं.

पहला- सामने किसी अवरोध के आने के कारण ट्रेन पटरी पर से उतर सकती है. कई बार ऐसा होता है कि कोई मवेशी या बड़ा जानवर अचानक से पटरी पर आ जाता है तो ट्रेन पटरी पर से उतर जाती है.

दूसरा- इंजन का कोई हिस्सा या पार्ट अगर गिर जाए और उस पर ट्रेन चढ़ जाए तो ऐसी स्थिति में भी पटरी पर से ट्रेन उतर सकती है.

तीसरा- पटरी के टूटे होने की स्थिति में भी ट्रेन पटरी पर से उतर सकती है. लेकिन ऐसी स्थिति में इंजन के साथ ट्रेन उतरती है. कानपुर के पास जो हादसा हुआ है उसमें इंजन पटरी पर से नहीं उतरा है.

कभी-कभी यह भी हो सकता है कि इंजन के निकलने के बाद पटरी के बीच का गैप बढ़े और तब पीछे के डिब्बे पटरी पर से उतर जाएं.

चौथा- कई बार किसी-किसी इलाके में उपद्रवी और ग़ैर सामाजिक तत्वों के तोड़-फोड़ करने के कारण भी ट्रेन पटरी पर से उतर जाती है.

जहां तक बुलेट ट्रेन चलाए जाने की बात है तो उसकी पटरी को बिछाने का खर्चा बहुत महंगा पड़ता है. पांच सौ किलोमीटर पटरी बिछाने का खर्चा एक लाख करोड़ पड़ता है.

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अभी तो भारत में जो मौजूदा लाइनें हैं, हम उन्हीं की सुरक्षा पर पूरा खर्चा नहीं कर पा रहे हैं.

ऐसे हालात में या तो कोई देश आकर भारत में पटरी बिछा दे या आर्थिक रूप से मदद हो तभी ये संभव है.

भारतीय रेलवे के लिए तो इतना खर्चा उठाना अभी संभव नहीं है. मेरी राय में जो बुनियादी ढांचा अभी हमारे पास है, पहले उसी पर ध्यान देना चाहिए.

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