क्या भारत में रेल हादसा कभी रुकेगा?

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Image caption पिछले 6 सालों का यह सबसे बुरा हादसा

यह किसी तगड़े भूकंप की तरह हिला देने वाला था. झटका इतना तेज़ था कि सो रहे यात्री एक दूसरे पर गिरने लगे. कई कोच आपस में ही टकरा गए. ये सारे पटरी से उतर उलट-पुलट गए. रविवार को हुए इस भयानक हादसे में बचे लोगों का कहना है कि दुर्घटना से पहले ट्रेन ट्रैक पर बेलगाम हो गई थी.

आख़िर ऐसा क्या हुआ कि भारत को पिछले छह सालों के सबसे भयावह रेल हादसे का सामना करना पड़ा. रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने शुरुआती बयान में कहा है कि यह हादसा रेल पटरी में गड़बड़ी के कारण हुआ है. सिन्हा ने कहा कि रेल पटरी में एक जर्क की शिकायत आई थी. उन्होंने कहा कि जहां हादसा हुआ वहीं जर्क था. यह कोई पहली बार नहीं है जब भारतीय रेलवे ट्रैक की स्थिति जांच के दायरे में आई है.

आखिर भारत में ट्रेनें पटरी से क्यों उतर जाती हैं?

भारत में 2014-15 में 131 रेल हादसे हुए और इसमें 168 लोग मारे गए. 2013-14 में 117 ट्रेन हादसे हुए और इसमें 103 लोग मारे गए थे. 2014-2015 में 60 फ़ीसदी रेल दुर्घटना ट्रेनों के पटरी से उतरने के कारण हुई. 1956 से 66 के बीच 1,201 रेल हादसों में 962 दुर्घटना पटरी से उतरने के कारण हुई. इन ज़्यादातर रेल हादसों में मानवीय भूलों को ज़िम्मेदार ठहराया गया. भारत में अभी क़रीब 115,000 किलोमीटर रेलवे ट्रैक है.

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Image caption 4,500 किलोमीटर रेलवे ट्रैक को दुरुस्त करने की ज़रूरत है

रेलवे मंत्रालय ने 2015 में अपने एक मूल्यांकन में बताया था कि 4,500 किलोमीटर रेलवे ट्रैक को दुरुस्त करने की ज़रूरत है. हालांकि फंड की कमी के कारण ये बेहद ज़रूरी काम नहीं हो रहे हैं. न तो नए ट्रैक का निर्माण हो रहा है और न ही उन्हें बदला जा रहा है. 2015 में केवल 2,100 किलोमीटर ट्रैक के नवीकरण का लक्ष्य रखा गया था.

भारतीय रेलवे में इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट के लिए गर्मी में ट्रैक का फैलना और सर्दियों में सिकुड़ना किसी दुःस्वप्न से कम नहीं है. 2014 में इस बात का उल्लेख रेलवे के एक आंतरिक ज्ञापन में किया गया था. इस साल जनवरी और मई महीने में रेलवे पटरी में गड़बड़ी के 136 मामलों को दुरुस्त किया गया था. जाड़े में रेलवे ट्रैक का तेज़ी से संकुचन होता है. इसके लिए रेलवे की तरफ़ से विंटर पट्रोलिंग शुरू की जाती है. इसमें पटरी के संकुचन की तहक़ीक़ात की जाती है.

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Image caption पूर्व रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी

समस्या केवल यही नहीं है. बेकार हो चुकी गाड़ियों को ट्रैक से बाहर करने के लिए फंड की ज़रूरत है. इन हादसों में गाड़ियों और ट्रेनों के टकराने के भी मामले हैं. भारत में 10 हज़ार से ज़्यादा मानवरहित क्रॉसिंग हैं. रेलवे फंड और निवेश की कमी से बुरी तरह जूझ रहा है. रेलवे सुरक्षा के नाम पर निवेश में भारी कमी है. पिछले साल एक रिपोर्ट में स्वीकार भी किया गया था कि सुरक्षा को लेकर रेलवे में जितना निवेश होना चाहिए उतना नहीं हो रहा है.

पूर्व रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी का कहना है कि भारतीय रेलवे दिवालिया हो गया है. उन्होंने कहा कि पूरा ध्यान ऑपरेशन के बजाय कॉस्मेटिक बदलावों पर है. राजस्व में भारी गिरावट आई है. इसमें 2015-16 में चार पर्सेंट की बढ़ोतरी हुई. यह पिछले वित्तीय वर्ष के मुक़ाबले 10-19 फ़ीसदी से काफी कम है. इसकी मुख्य वजह आर्थिक मंदी के कारण भाड़े के मालों में कमी आना और पैसेंजर्स बुकिंग्स में भी मामूली गिरावट आई है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में बुलेट ट्रेन चलाने की घोषणा की है. इसके साथ ही पैसेंजर्स की सुविधा बढ़ाने और स्टेशनों पर वाई-फाई का भी वादा किया गया है. हालांकि अब लोगों को कहना है कि सरकार को पहले लोगों की सुरक्षित यात्रा पर ध्यान देना चाहिए.

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