वो 5 बड़े मौक़े, जब मोदी पहले संसद के बाहर बोले

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नोटबंदी के फ़ैसले पर देश भर में भले कितना हंगामा मचा, लेकिन विपक्ष की मांग के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अब तक संसद में इस मुद्दे पर बयान देने नहीं पहुंचे हैं.

जापान से लेकर गोवा तक, मोदी कई जगह अपने इस फ़ैसले का बचाव कर चुके हैं, लेकिन संसद में नहीं. हालांकि ये पहला वाकया नहीं है, जब उन्होंने ऐसा किया हो.

विपक्ष ने कई बार मोदी से संसद में बयान देने की मांग की हो, लेकिन उन्होंने उस विषय पर पहले विचार व्यक्त करने के लिए सदन नहीं, दूसरे मंच चुने. ऐसे ही पांच वाकये ये रहे:

1. नोटबंदी का मसला

नोटबंदी का ऐलान करने के बाद नरेंद्र मोदी कई मौक़ों पर कई जगह बोल चुके हैं, लेकिन संसद में इस मुद्दे पर उनके भाषण का इंतज़ार है.

उन्होंने इस फ़ैसले को काले धन के ख़िलाफ़ ऐतिहासिक क़दम और स्वच्छ भारत अभियान बताया. जब लोगों को दिक़्क़तें पेश आईं, तो उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि उन्हें इस बात का इल्म था कि परेशानी आएगी.

16 नवंबर से संसद का शीतकालीन सत्र जारी है. लेकिन करेंसी बंद करने और काले धन के मुद्दे पर संसद में पीएम का बयान अभी तक नहीं आया. अतीत में भी ऐसा कई बार हो चुका है.

2. ललित मोदी-सुषमा स्वराज

भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे पूर्व क्रिकेट प्रशासक ललित मोदी की मदद को लेकर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की ख़ासी आलोचना हुई थी.

उन पर ललित मोदी को ट्रैवल से जुड़े दस्तावेज़ ब्रिटेन की ओर से देने पर भारत को कोई आपत्ति न होने के बारे में आरोप लगे थे.

विवाद छिड़ने के बाद विपक्ष ने सुषमा स्वराज और राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के इस्तीफ़े की मांग की थी.

नरेंद्र मोदी से संसद में आकर इस पर बयान देने की मांग की गई थी. लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

संसद में कई दिन तक चले हंगामे के बीच विदेश मंत्री ने तो अपनी सफ़ाई पेश की ही थी, उनकी पार्टी के कुछ और नेताओं ने इस मामले पर बयान दिए थे.

3. भूमि अधिग्रहण बिल

किसानों से ज़मीन ख़रीदने के नियमों में बदलाव करने से जुड़े विधेयक को लेकर भी ऐसा हुआ.

विपक्ष के ज़ोरदार विरोध की वजह से सरकार को कामयाबी नहीं मिली. और जब लगा कि मोदी संसद में बयान देकर इस बिल से पीछे हटने का ऐलान करेंगे, उन्होंने पहले 'मन की बात' कार्यक्रम का मंच चुना.

मोदी ने कहा कि वो इस मुद्दे पर किसी को भी किसानों के मन में डर बैठाने की इजाज़त नहीं देंगे.

4. रोहित वेमुला की ख़ुदकुशी

हैदराबाद यूनिवर्सिटी में पीएचडी छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या के मामले में भी ऐसा हुआ था.

सरकार के ख़िलाफ़ कई शहरों में प्रदर्शन हुए और विपक्ष ने भी इसे ख़ूब उछाला. प्रधानमंत्री से इस मामले में संसद में बयान देने की मांग उठी.

लेकिन मोदी ने ऐसा नहीं किया. वेमुला की आत्महत्या के छह दिन बाद मोदी ने लखनऊ की एक यूनिवर्सिटी में कहा, ''...मेरे देश के नौजवान बेटे रोहित को आत्महत्या के लिए मजबूर होना पड़ा...उसके परिवार पर क्या बीती होगी...मां भारती ने अपना एक लाल खोया है.''

5. गोरक्षकों का मामला

उत्तर प्रदेश के दादरी में अख़लाक़ की हत्या हो या फिर गुजरात-हरियाणा समेत देश के कई हिस्सों में गोरक्षा के नाम पर दलितों की पिटाई हो, पीएम से संसद में बयान देने की मांग उठी.

लेकिन सबसे पहले संसद में न बोलते हुए, उन्होंने इंदिरा गांधी स्टेडियम में टाउनहॉल मीटिंग में इस विषय पर अपने विचार रखे.

मोदी ने कहा कि जो लोग गोरक्षा के नाम पर दुकान चला रहे हैं, उनमें से अधिकतर गोरक्षक हैं ही नहीं.

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