नोटबंदी- कितना मुश्किल है 20 अरब नोटों को नष्ट करना?

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मोदी सरकार के 500 और 1000 के पुराने नोट का चलन बंद करने से भारतीय रिज़र्व बैंक के सामने नए नोट मुहैया कराने के साथ-साथ रद्दी हुए नोटों को नष्ट करने की चुनौती भी है.

एक आकलन के मुताबिक बाज़ार में 500 और 1000 के करीब 20 अरब नोट रद्दी में तब्दील होने वाले हैं. रिज़र्व बैंक के मुताबिक मार्च, 2016 में भारतीय बाज़ार में 90 अरब नोट (छोटे-बड़े सभी मिलाकर) चलन में हैं,यानी कुल नोट में क़रीब 35 फ़ीसदी नोट को नष्ट करना है.

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भारत, नोटों के उत्पादन और खपत के मामले में चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है.

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हालांकि, इन नोटों को नष्ट करने की चुनौती बहुत मुश्किल नहीं है, क्योंकि रिज़र्व बैंक समय-समय पर सड़े-गले नोटों को नष्ट करता रहा है. दुनिया के दूसरे देशों के भी केंद्रीय बैंकों की यह ज़िम्मेदारी होती है.

रिजर्व बैंक इन नोटों को नष्ट करने के लिए कंप्रेस करके उन्हें ठोस गत्ते में बदल देता है. इन गत्तों का इस्तेमाल ईंधन के तौर पर फैक्ट्री के बॉयलरों में होता है. लेकिन रिज़र्व बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नष्ट हुए नोट से बने गत्ते, ईंधन के तौर पर इस्तेमाल करने लायक नहीं होते.

वैसे इसकी प्रक्रिया रिज़र्व बैंक के दफ़्तरों में ही होती है. पहले नोटों को कतरा जाता है. रिजर्व बैंक के दफ़्तरों में नोट कतरने वाली मशीनें होती हैं. रिजर्व बैंक के देश भर में फैले 19 दफ़्तरों में ऐसी 27 मशीनें हैं.

ये मशीनें पहले तो नोट को छोटे-छोटे टुकड़ों में कतरती हैं, फिर उन्हें कंप्रेस करके गत्ते में बदलती हैं. इन गत्तों को भारत के बड़े भू-भाग में दबा दिया जाता है.

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हालांकि, कई बार ऐसा भी होता है कि कतरे हुए नोटों को रिसाइकिल कर उनसे फ़ाइल, कैलेंडर और पेपर-वेट बनाए जाते हैं. इसके अलावा बॉल प्वाइंट पेन रखने वाले बॉक्स, टी कॉस्टर, कप और छोटी ट्रे इत्यादि का निर्माण भी सोवेनियर के लिए किया जाता है.

अमरीका में भी नोटों के साथ यही किया जाता है. जाली नोट को सीक्रेट सर्विस के पास भेजा जाता है, जहां उन्हें कतर के नष्ट किया जाता है. वहां भी कतरे हुए नोट को रिसाइकिल करके फ़ाइल, कैलेंडर इत्यादि उपहार सामग्री बनाने का चलन है.

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अधिकारियों की मानें तो 20 अरब नोट को नष्ट करना कोई बड़ी चुनौती नहीं है. हर साल बैंक अरबों नोट को नष्ट करता ही है. 2015-16 के दौरान 16 अरब नोट नष्ट किए गए थे. 2012-2013 में जब चलन में पांच लाख नकली नोट पकड़े गए थे, तब भी रिज़र्व बैंक ने 14 अरब नोट नष्ट किए थे.

रिज़र्व बैंक के एक अधिकारी ने बताया, "हमारे लिए इतने नोटों को नष्ट करना मुश्किल काम नहीं है, क्योंकि काफी उच्च क्षमता वाली मशीनें हैं, जो नोटों को आसानी से नष्ट कर सकती हैं. ये सब ऑटोमेटिक मशीनें हैं."

ज़ाहिर है, ऐसे में 20 अरब नोट कुछ ही दिनों में नष्ट हो जाएंगे. भारत में साल 1861 से कागज़ी मुद्रा का चलन शुरू हुआ. 1920 के दशक तक भारतीय नोट इंग्लैंड में छपा करते थे. रिज़र्व बैंक ने पैसों की आपूर्ति की शुरुआत 1935 में शुरू की.

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