इज़्ज़त आँखों में होती है घूँघट में नहीं

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फरीदाबाद के एक गांव में औरतों ने घूंघट करने से कर दिया है इन्कार

अंजु यादव मिर्ज़ापुर मे रहती हैं और शादी के बाद कई सालों तक इन्होंने घूँघट किया. लेकिन इस साल अपने परिवार की महिला सदस्यों के साथ मिलकर घूँघट को कहा बाय बाय.

इन्होंने बताया कि हरियाणा के फ़रीदाबाद ज़िले के बहुत से गाँव की महिला सरपंच और ज़िला आयुक्त ने इनका साथ दिया. इसमें हिंदू और मुस्लिम सरपंच शामिल हैं.

जब से अंजू यादव और उनकी बहन मंजू यादव ने घूँघट को कहा अलविदा तब से बड़ी दिलचस्प प्रतिक्रिया सामने आईं हैं.

बीबीसी से ख़ास बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि उनके परिवार के लोगों ने जहां उनका साथ दिया वहीं दूसरी तरफ़ उनकी सास को कुछ औरतों ने ही घेरकर बोला, "तुम सब सामाज की प्रथा के खिलाफ़ क्यों जा रही हो ? शर्म हया है कि नही?"

इनके ही परिवार की कुछ औरतों ने इनका साथ नही दिया इसलिए ये मानती हैं कि औरत ही औरत की दुशमन हो सकती है.

परिवार और गाँव के मर्दों से इन्हे ज़्यादा सपोर्ट मिला. बल्कि जैसे जैसे बीबीसी से बातचीत लाईव चल रही थी वैसे वैसे बहुत से पुरुषों ने कहा कि यह एक अच्छी शुरुआत है और मंजू की हौसला अफ़ज़ाई की.

अंजू यादव को अपने परिवार का साथ मिला और अब वो आज़ाद महसूस करती हैं.

अंजू यादव ने मुस्कुराते हुए कहा , "मैं अपनी बात कहने से नही डरती. मेरा आत्मविश्वास बड़ा है. हम सर पर पल्लू अभी भी रखते हैं बस चेहरा नही छिपाते. जब आप बहु को बेटी बनाकर लाते हो तो उससे बेटी जैसे ही रखो. पर्दे में रखना भी है और खुले में शौच के लिए भी भेजना है, ये तो ग़लत है. शर्म आँखों मे होती है घूँघट में नही . मेरी खुद की दो लड़कियाँ हैं और मैं उनको बहुत काबिल बनाउँगी."

यह बातचीत हिस्सा है '100 Women' सीरीज़ का. महिलाओं की ऐसी ही विशेष कहानियों को दुनिया के सामने लाने के लिए बीबीसी लेकर आया है '100 Women',

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