रिज़र्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल हाज़िर हों....

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नोटबंदी के दौर में रिज़र्व बैंक के गर्वनर उर्जित पटेल कहाँ है, सोशल मीडिया पर आजकल ये सवाल बड़ी संख्या में लोग पूछ रहे हैं. इसकी वजह ये है कि उर्जित पटेल सामने नहीं आ रहे हैं.

ऐसे समय में जब इस मामले में देश की संसद और संसद के बाहर बवाल मचा है और लोगों को परेशानी भी हो रही है, उर्जित पटेल ने कोई बयान नहीं दिया है.

कितना उचित है उर्जित पटेल का ख़ामोश रहना? या फिर लोग बेमतलब ही उर्जित पटेल को निशाना बना रहे हैं.

हमने आर्थिक मामलों के जानकार दो पत्रकारों से इस मुद्दे पर बात की और जानने की कोशिश की कि आख़िर उर्जित पटेल क्यों सामने नहीं आ रहे? क्या कर रहे होंगे इस समय उर्जित पटेल?

सुषमा रामचंद्रन, वरिष्ठ पत्रकार

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नोटबंदी के दौर में रिज़र्व बैंक के गवर्नर ने कोई बयान नहीं दिया है. इसी वजह से लोग पूछ रहे हैं उर्जित पटेल कहाँ हैं.

सब लोग यही चाहते हैं कि रिज़र्व बैंक के गवर्नर इस पर कुछ प्रतिक्रिया ज़रूर दें.

प्राथमिकता रिज़र्व बैंक गवर्नर के साथ होती है, क्योंकि करेंसी वहीं से आता है. करेंसी का मामला रिज़र्व बैंक के अंतर्गत आता है.

ये ज़रूर है कि जैसे आजकल वित्त मंत्रालय हर दूसरे दिन प्रेस के सामने आकर बोलता है, वैसा कोई रिज़र्व बैंक का गर्वनर नहीं करेगा.

लेकिन मुझे लगता है कि इस पर इतना बड़ा विवाद चल रहा है, इसलिए उन्हें कम से कम इतने दिनों में एक बार लोगों को आश्वासन देना चाहिए था कि लोगों को फिक्र करने की ज़रूरत नहीं है.

जो हालात हैं, उससे तो ये नहीं लगता कि रिज़र्व बैंक ने पर्याप्त काम किया है.

प्रांजल शर्मा, आर्थिक मामलों के वरिष्ठ पत्रकार

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ऐसे समय में जब दशकों के बाद इतना बड़ा क़दम उठाया गया है, मुझे लगता है कि रिज़र्व बैंक के गवर्नर को अपना वक्तव्य देना चाहिए. उनकी जो आलोचना हुई है, वो कुछ हद तक सही है.

शायद रिज़र्व बैंक को ये लग रहा होगा कि ये निर्णय सरकार का है, तो उसे ही आगे आना चाहिए, आरबीआई को नहीं.

ऐसी स्थिति में कौन सही बयान दे, कौन सबके अच्छा बयान दे- ये सरकार की ज़िम्मेदारी है या रिज़र्व बैंक की. मुझे लगता है कि रिज़र्व बैंक को सामने आकर आश्वासन देना चाहिए.

रिज़र्व बैंक जिस तरह बैंकों से संपर्क में है और स्थिति सुधारने के लिए क़दम उठा रहा है, उसे ये बातें जनता के सामने रखनी चाहिए.

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नए नोट कितनी तादाद में छापे जा रहे हैं और कैसे ये नोट देश के दूर-दराज़ इलाक़ों तक पहुँचाए जा रहे हैं- ये बताने की पूरी ज़िम्मेदारी रिज़र्व बैंक की है.

मुझे लगता है कि उर्जित पटेल का ध्यान इस पर ज़रूर होगा. उनका ध्यान इस पर भी होना चाहिए कि बैंकों के साथ कितने एटीएम हैं और एटीएम को लेकर जो समस्याएँ आ रही हैं, वे कैसे ठीक किए जाएँ.

असली और नकली नोटों पर भी उनकी नज़र होगी. बैंकों के कामकाज पर भी उर्जित पटेल की नज़र होगी.

मुझे लगता है कि उनकी दिनचर्या में ये ज़रूर शामिल होगा कि वे तय करें कि सारे बैंक इस स्थिति को बेहतर तरीक़े से निपटे.

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