बेनामी संपत्ति पर वार कितना मुश्किल?

नोटबंदी यानी 500 और 1000 के पुराने नोटों पर रोक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बेनामी संपत्ति को निशाना बनाने का ऐलान किया है.

गोवा में पिछले दिनों मोदी ने कहा था, "हम ऐसी संपत्तियों के खिलाफ कार्रवाई करने जा रहे हैं जो किसी और के नाम (बेनामी) पर खरीदी गई है. ये देश की संपत्ति है."

मोदी की इस घोषणा के बाद सर्च इंजन गूगल पर लोग बेनामी संपत्ति के बारे में खोजबीन करते नज़र आए हैं. इससे पहले, 'काले धन को सफेद कैसे बनाएं' भी गूगल ट्रेंडस में छाया रहा था.

बेनामी सौदों को रोकने के लिए बनाया गया क़ानून एक नवंबर से प्रभाव में आ गया है.

आयकर विभाग के पूर्व कमिश्नर बिश्वबंधु गुप्ता ने बीबीसी हिंदी से बातचीत में कहा कि मौजूदा क़ानून को अधिक धारदार बनाया गया है.

उन्होंने बताया कि इस कानून के अमल में आने के बाद सरकार को अधिकार मिल गया है कि वो बेनामी संपत्तियों को ज़ब्त कर सकती है. इसके लिए सरकार को वैधानिक और प्रशासनिक शक्तियां प्रदान की गई हैं.

हालाँकि गुप्ता का मानना है कि बेनामी संपत्ति का पता लगाना चुनौती होगा. क्योंकि देश के कुछ ही हिस्सों में ज़मीन संबंधी आंकड़े कंप्यूटराइज्ड हो सके हैं.

यानी बेनामी संपत्ति के अधिकांश मामलों को उजागर करने में भेदियों का ही सहारा लेना होगा.

इस क़ानून के तहत बेनामी सौदों में लिप्त पाए जाने पर सात साल की सज़ा और जुर्माने का प्रावधान किया गया है.

संसद ने अगस्त 2016 में बेनामी सौदा निषेध क़ानून को पारित किया था. इसके प्रभाव में आने के बाद मौजूदा बेनामी सौदे (निषेध) कानून 1988 का नाम बदलकर बेनामी संपत्ति लेन-देन क़ानून 1988 कर दिया गया है.

बेनामी है क्या

इस तरह के लेन-देन में जो व्यक्ति संपत्ति के लिए भुगतान करता है, वो इसे अपने नाम से नहीं खरीदता. जिस व्यक्ति के नाम से ये संपत्ति खरीदी जाती है उसे बेनामदार कहा जाता है और संपत्ति बेनामी कहलाती है.

बेनामी संपत्ति चल, अचल या वित्तीय दस्तावेजों के तौर पर हो सकती है.

आमतौर पर ऐसे लोग बेनामी संपत्ति रखते हैं जिनकी आमदनी का ज्ञात स्रोत स्वामित्व वाली संपत्ति खरीदने के लिहाज से पर्याप्त नहीं होता है.

ये नहीं है बेनामी

पत्नी या बच्चों के नाम से ख़रीदी गई संपत्ति जिसके लिए भुगतान आय के ज्ञात स्रोतों से किया गया है यानी इसका जिक्र आयकर रिटर्न में किया गया है.

भाई, बहन या अन्य रिश्तेदारों के साथ संपत्ति में साझा मालिकाना हक जिसके लिए भुगतान घोषित आय से किया गया हो.

क्या है सज़ा

  • बेनामी लेनदेन का दोषी पाए जाने पर कम से कम एक साल की सज़ा
  • अधिकतम सात साल की सज़ा और संपत्ति के बाज़ार मूल्य का 25 फ़ीसदी तक जुर्माना
  • जानबूझकर ग़लत जानकारी देने पर कम से कम छह महीने की सज़ा
  • अधिकतम पांच साल की सजा और संपत्ति के बाज़ार मूल्य का 10 फ़ीसदी तक का जुर्माना

क्या हैं आशंकाएं?

जानकारों का मानना है कि देश के कई हिस्सों में भूमि स्वामित्व और इसके उपयोग पर स्थिति स्पष्ट नहीं है और ये अनियमित है.

पूर्व में हुए बेनामी लेन-देन के मामलों का क्या होगा, हालाँकि वैध खरीदारों के संरक्षण के लिए प्रावधान किए गए हैं.

संविधान के तहत भूमि राज्यों का विषय माना जाता है, लेकिन बेनामी संपत्ति मामले में जब्त परिसंपत्तियां केंद्र सरकार के दायरे में आएंगी.

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