नोटबंदी पर 'भारत बंद': किसकी हां, किसकी ना

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केंद्र सरकार के पांच सौ और हजार रुपए के पुराने नोट वापस लेने के फैसले के ख़िलाफ़ विपक्षी दलों ने सोमवार को बंद बुलाया है लेकिन इस बंद के आह्वान में भी विपक्ष में टूट साफ दिख रही है.

वाम मोर्चा की ओर से नोटबंदी के ख़िलाफ़ बुलाए गए भारत बंद पर दूसरे विपक्षी दलों की राय अलग-अलग है.

वाम मोर्चे की ओर से मुख्य रूप से केरल, पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में भारत बंद बुलाया गया है.

कांग्रेस का कहना है कि वे 'भारत बंद' नहीं चाहते, लेकिन नोटबंदी के ख़िलाफ़ देश भर में विरोध प्रदर्शन करेंगे. कांग्रेस ने सोमवार को 'जनाक्रोश दिवस' बुलाया है.

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कांग्रेस नेता आनंद शर्मा का कहना था, ''दशकों की मेहनत के बाद भारत इस मुक़ाम पर पहुंचा था और प्रधानमंत्री ने अपने अहंकार की वजह से देश का अपमान किया है.''

उन्होंने कहा, ''भारत जैसे गरीब देश में जहां बैंकिंग की सुविधा कई लोगों के पास नहीं है, उन्हें क्रेडिट और डेबिट कार्ड, मोबाइल बैंकिंग इस्तेमाल करने की ताक़ीद देना सही नहीं है. पूरी दुनिया में कैशलेस इकोनॉमी कहीं नहीं है. सरकार के इस फ़ैसले ने पूरी बैंकिंग व्यवस्था को चौपट कर दिया है.''

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी बंद के समर्थन में नहीं हैं, लेकिन नोटबंदी के विरोध में एकजुट प्रदर्शन का आह्वान करते हुए कोलकाता में सोमवार को रैली करेंगी.

ममता बनर्जी का कहना है कि वो काले धन के ख़िलाफ़ हैं लेकिन इसके लिए आम लोगों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए.

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आम आदमी पार्टी भारत बंद पर कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के साथ है. वह दिल्ली के सेंट्रल पार्क में रैली करेगी.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने नोटबंदी को देश का सबसे बड़ा घोटाला बताते हुए फ़ैसला वापस लेने की मांग उठाई थी. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से इस पूरे मामले की जांच कराने की बात भी कही थी.

जदयू प्रमुख और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने साफतौर पर कहा है कि वे 'भारत बंद' का समर्थन करते हैं. उन्हें भरोसा है कि काले धन से लड़ाई में केंद्र सरकार का ये कदम कारगर साबित होगा. वे नोटबंदी के ख़िलाफ़ सभी विरोध प्रदर्शनों से दूर रहेंगे.

नीतीश कुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ़ करते हुए कहा था कि नोटबंदी के फ़ैसले से काले धन के ख़िलाफ़ लड़ाई में मदद मिलेगी.

बसपा मुखिया मायावती का कहना है कि वे काला धन और भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ तो हैं लेकिन इस तरह बिना तैयारी के लिए गए निर्णय को सही नहीं मानतीं.

उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री के मुताबिक़ विरोधी बिना तैयारी के लिए गए नोटबंदी के फ़ैसले का विरोध कर रहे हैं, ना कि अपने हितों की वजह से. उनका मानना है कि इससे देश की 90 फ़ीसदी आबादी को दिक्कत हो रही है.

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नरेंद्र मोदी की ओर से 8 नवंबर को 500 और 1000 नोटों पर पाबंदी लगाने के फैसले के बाद देश भर में बैंकों और एटीएम के सामने लंबी लंबी कतारों में लोग नकदी पाने के लिए जूझते नजर आए.

सरकार का कहना है कि उसने यह कदम काले धन के ख़िलाफ़ और आम आदमी के हित में ये कदम उठाया है.

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