नोटबंदी- भगवान के घर भी उधार!

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भारत सरकार के 500 और 1000 के नोट बंद होने का असर हर-की-पौड़ी के घाटों पर भी नज़र आ रहा है.

नक़दी की कमी का हरिद्वार के धार्मिक पर्यटन पर सीधा असर पड़ा है और घूमने के लिए हरिद्वार आने वाले लोगों की संख्या ख़ासी घट गई.

गंगा आरती जैसे आयोजनों पर इसका असर साफ़ दिखता है.

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लेकिन जिन्हें श्राद्ध या अंतिम संस्कार जैसे धार्मिक कार्य करने हैं उनके पास कोई विकल्प नहीं है.

हरिद्वार के तीर्थ में पुरोहित समाज ने नक़दी की कमी को देखते हुए कई पुराने यजमानों के लिए उधार में पूजा संपन्न करवाना शुरू किया है.

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Image caption उज्जवल पंडित ने बताया कि उधार से हो रहे हैं धार्मिक अनुष्ठान.

अखिल भारतीय युवा तीर्थ पुरोहित महासभा के अध्यक्ष उज्जवल पंडित कहते हैं, "अस्थि विसर्जन और श्राद्ध जैसे कार्यों के लिए हरिद्वार आने वाले पुराने यजमानों के धार्मिक अनुष्ठान तीर्थ पुरोहित फ़िलहाल उधार में कर रहे हैं. वह लोग बाद में पैसे दे सकते हैं."

उज्जवल ये साफ़ करते हैं कि ये सुविधा सिर्फ़ उन्हीं लोगों को दी जा रही है जिनके पारिवारिक बही संबंधित तीर्थ पुरोहित के पास है. और यह भी कि इस बही में दान-दक्षिणा का हिसाब दर्ज किया जा रहा है.

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Image caption राजस्थान से हरिद्वार आए सुमित मोदी नोटबंदी के चलते मुश्किल में फंस गए थे

लेकिन कुछ लोग ऐसे भी थे जिनके पास नए नोट तो थे लेकिन दो हज़ार के.

राजस्थान के बीकानेर से हरिद्वार आए सुमित मोदी कुछ ऐसी ही समस्या से जूझ रहे थे जब हरिद्वार के पंडितों ने न सिर्फ़ उन्हें छुट्टे पैसे दिए बल्कि बाद में अकाउंट में पैसे ट्रांस्फ़र करने की बात पर विश्वास करते हुए उधार में पूजा भी संपन्न करवा दी.

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पूर्वांचल के पंडित शैलेष मोहन ने बिहार के गया से आए अपने एक यजमान से चेक में पैसे ले लिए ताकि उन्हें घर से बाहर नक़दी की दिक्क़त न हो.

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Image caption पूर्वांचल के पंडित शैलेष मोहन चेक से भुगतान ले रहे हैं.

उज्जवल पंडित कहते हैं कि दरअसल अस्थि विसर्जन, श्राद्ध जैसे धार्मिक अनुष्ठान ऐसे हैं जिन्हें टाला नहीं जा सकता, इसीलिए तीर्थ पुरोहित समाज ने ये बीच का रास्ता निकाला है ताकि यजमान का 'वह लोक' भी न बिगड़े और न पंडितों का 'यह लोक'.

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