नोटबंदी- 'डिजिटल भुगतान से घटेगी ग़रीबी'

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पेटीएम के सीईओ से ख़ास बातचीत

नोटबंदी का फ़ैसला लागू होने के बाद बड़ी तादाद में लोग ऑनलाइन और डिजिटल भुगतान को अपना रहे हैं.

ई-वॉलट कंपनी पेटीएम के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी विजय शेखर शर्मा मानते हैं कि सरकार का फ़ैसला सही है क्योंकि इससे करदाताओं का बेस 2-3 प्रतिशत से आगे बढ़ेगा और डिजिटल भुगतान से देश के ग़रीबों का फ़ायदा होगा.

बीबीसी संवाददाता शिल्पा कन्नन ने ई-वॉलट कंपनी पेटीएम के संस्थापक से ख़ास बातचीत की है. बातचीत के चुनिंदा हिस्से-

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नोटबंदी की वजह से ऑनलाइन और आप जैसी ई-वॉलेट कंपनियों के लिए तो बहतु अच्छा समय है. लोगों की क्या प्रतिक्रिया रही है?

इस फ़ैसले के बाद लोग अब पहले जैसे नक़दी का इस्तेमाल नहीं कर सकते, उन्हें ऑनलाइन पेमेंट या ई-वॉलेट का इस्तेमाल करना होगा. ज़ाहिर है, बड़ी तादाद में लोग इस ओर आ रहे हैं. हम पहले ऑनलाइन पेमेंट पर ज्यादा ध्यान दे रहे थे, पर इन दिनों दुकानों में पेटीएम के ज़रिए बहुत लोग पैसों का भुगतान कर रहे हैं.

हमारी कंपनी के लगभग 15 करोड़ ग्राहक पहले ही थे. अभी हम रोज़ाना पांच लाख नए ग्राहक बना रहे हैं. हम रोज़ाना दसियों हज़ार दुकानदारों को दैनिक पेमेंट प्रणाली से जोड़ रहे हैं. इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल पेमेंट से जुड़ी कंपनियों के लिए तो सोने ही सोने का माहौल है, इसे आप "गोल्डन रश" भी कह सकते हैं.

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Image caption डिजिटल पेमेंट कंपनी पेटीएम के संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी विजय शेखर शर्मा का मानना है कि नोटबंदी से ग़रीबी कम होगी

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इतने लोग ऑनलाइन पेमेंट सिस्टम से जुड़ तो रहे हैं, लेकिन क्या भारत की प्रणाली सुरक्षित है? वॉलेट पेमेंट से जुड़ने के इच्छुक लोगों को इसकी तकनीक और तौर तरीक़ों की जानकारी है?

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केंद्र सरकार के बड़े नोट बंद करने के ऐलान के बाद इससे जुड़े भोजपुरी गीत धूम मचा रहे हैं.

इसमें कोई शक नहीं कि हमें बहुत बड़ी तादाद में लोगों को बहुत कम समय में इंटरनेट, स्मार्टफ़ोन, डिजिटल पेमेंट के तौर तरीक़े सिखाने हैं, यह बहुत कठिन है. इसमें तकनीक, इंटरनेट तक पंहुच, प्रशिक्षण की बाते हैं. सबसे बड़ी बात है कि उन्हें क्या करना है, यह भी सोचना है.

लेकिन देश जल्दी से डिजिटल हो रहा है, लोगों में इसका जज़्बा है, उत्सुकता है. लोग सीख रहे हैं, एक दूसरे की मदद कर रहे हैं. कुछ लोग इसे स्वीकार नहीं कर पाएंगे, यह भी सच है. पर देश के पास डिजिटल होने का बहुत बड़ा मौक़ा है. मुमकिन है कि देश नक़द से प्लास्टिक मनी के बदले सीधे नक़द से मोबाइल पेमेंट की ओर लंबी छलांग लगा ले.

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बीते दिनों आप उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री से मिलने गए तो हेवी ट्रैफ़िक की वजह से आपको रिक्शे में जाना पड़ा. क्या आप उस रिक्शे वाले को यह समझाने में कामयाब होंगे कि वह पेटीएम का इस्तेमाल करे?

इस देश के रिक्शे वाले, ऑटो रिक्शे वाले या टैक्सी वाले बहुत ही कुशल उद्यमी हैं, वे सब कुछ सीखना चाहते हैं. उनकी समस्या यह है कि वे पेटीएम से भुगतान लें तो उसका इस्तेमाल कहां और कैसे करें.

लेकिन जब हम उन्हें यह बताते हैं कि वे इसका इस्तेमाल रीचार्ज में, बिल भुगतान में कर सकते हैं और चाहें तो बैंक में पैसे ट्रांसफ़र कर वहां से निकाल भी सकते हैं, तो वे ख़ुशी ख़ुशी इसे स्वीकार कर लेते हैं.

आपकी नज़र में नोटबंदी से तीन सबसे बड़े फ़ायदे क्या हैं?

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नोटबंदी की वजह से बहुत से लोगों को काफ़ी दिक़्क़तें हो रही हैं, इसमें कोई शक नहीं है.

लेकिन, नक़द से भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिलता है, जो अब कम हो जाएगा. इस देश के बमुश्किल दो-तीन फ़ीसद लोग कर चुकाते हैं. इस फ़ैसले की वजह से ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को कर के दायरे में लाने में सुविधा होगी. इससे कर उगाही भी बढ़ेगी.

ऑनलाइन भुगतान प्रणाली पूरी तरह लागू होने से सरकार की योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक लोगों तक पंहुचेगा. ज़्यादा से ज़्यादा लोगों को वित्तीय प्रणाली से जोड़ा जा सकेगा. इससे ग़रीबी कम होगी.

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आम लोग नक़द बग़ैर सब्ज़ी और फल जैसी रोज़मर्रा की चीज़ें कैसे ख़रीद पाएंगे?

सब्ज़ी या फल या इस तरह की चीज़ें बेचने वाले छोटे दुकानदारों ने बहुत ही तेज़ी से नई प्रणाली को स्वीकार कर लिया है.

आप अपने कुछ अनुभव बताएं जहां पेटीएम से भुगतान स्वीकार नहीं किया गया?

मैं अपने बच्चो को स्कूल छोड़ने गया और चाय की एक दुकान पर चाय पी और जब पेटीएम से भुगतान करना चाहा तो उसने कहा कि हमारे पास मोबाइल फ़ोन ही नहीं है तो हम पेटीएम से पैसे भला कैसे लेंगे.

इसी तरह मैं एक रेस्तरां में खाने गया और पेटीएम से भुगतान करने की इच्छा जताई तो उन्होंने साफ़ कह दिया कि वे सिर्फ़ कार्ड से पेमेंट लेते हैं. ऐसी कई जगह हैं, जहां पेटीएम अभी भी नही चलता है.

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