नज़रिया: नोटबंदी पर विपक्ष का विरोध गलत

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फ़ैसले का सकारात्मक असर होगा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बीजेपी के तमाम सांसदों और विधायकों से कहा है कि वो अपने बैंक अकाउंट का ब्यौरा पार्टी अध्यक्ष अमित शाह को सौंपे.

अगर नरेंद्र मोदी पार्टी के मुखिया होने के नाते अपनी पार्टी से इसकी शुरुआत कर रहे हैं तो यह बड़ी अच्छी बात है.

इसका जनता के बीच बहुत सकारात्मक असर होगा. अगर दूसरी पार्टी ऐसा नहीं करती है तो जनता में विपक्ष के ख़िलाफ़ छवि बनेगी.

उनके लिए यह धर्मसंकट जैसी स्थिति होगी.

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राजनीतिक जीवन में सभी को स्वेच्छा से अपनी संपत्ति की घोषणा करनी चाहिए क्योंकि वो सार्वजनिक जीवन में होते हैं.

अगर इसका 50 फ़ीसदी भी पालन होता है तो कम से कम इसकी शुरुआत तो हुई. एक मापदंड तो बना.

आप बिल्कुल खड़े रहें और चले ही नहीं, उससे तो बेहतर है कि आप दस कदम ही चले लेकिन चले तो सही.

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जनता के बीच तो यह अवधारणा बनी हुई है कि सभी नेता भ्रष्ट होते हैं.

यह पूरी तरह से सच ना भी हो लेकिन यह लोगों की सोच तो बन ही गई है और कई बार लोगों की धारणाएं सच्चाई से भी ज्यादा खतरनाक होती है.

कोई भी राजनीतिक पार्टी आरटीआई के तहत नहीं जाना चाहती है. इस माहौल में यह कदम बहुत सराहनीय है.

हर चीज को तात्कालिक नतीजे के लिहाज से ही नहीं देखें. कुरीतियां धीरे-धीरे ही खत्म होती हैं.

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जनता भले ही ख़ुद आदर्शवादी हो या ना हो लेकिन वो उसी के पीछे जाती है जो आदर्शवादी होते हैं.

विपक्ष अगर इसका विरोध करता है तो ये उसके लिए नुक़सान की बात है.

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नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता का ग्राफ़ जो धीरे-धीरे गिर रहा था, वो गिरना रूक गया है.

इसे आप उप चुनावों में बीजेपी को मिलने वाली जीत में देख सकते हैं.

(बीबीसी संवाददाता वात्सल्य राय से बातचीत पर आधारित)

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