नोटबंदी: डिजिटल भुगतान से उबरेंगें बाज़ार?

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नोटबंदी के बाद से चरमराई अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य भर के नगरीय इलाकों की सभी संस्थाओं और दुकानों में डिजिटल भुगतान की सुविधा मुहैया कराने के निर्देश जारी किए हैं.

नोटबंदी के बाद से बाज़ार की हालत खराब है. एटीएम और बैंकों में भी नए नोटों की कमी बनी हुई है.

प्वाइंट ऑफ सेल मशीन के सहारे डिजिटल भुगतान की सुविधा को इसी मुश्किल से उबरने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है.

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Image caption छत्तीसगढ़ के नगरीय प्रशासन और वाणिज्य कर मंत्री अमर अग्रवाल

राज्य के नगरीय प्रशासन और वाणिज्य कर मंत्री अमर अग्रवाल ने बीबीसी को बताया,"देर-सबेर हमें डिजिटल भुगतान की प्रक्रिया को अपनाना ही है. हम चाहते हैं कि आम जनता को किसी तरह की मुश्किल ना हो. इसलिए हमने डिजिटल भुगतान की प्रक्रिया को राज्य भर में अपनाने की शुरुआत की है."

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने सभी कलेक्टरों को निर्देश दिया है कि वो सौ फ़ीसदी दुकानों, संस्थाओं और प्रतिष्ठानों में डिजिटल भुगतान की सुविधा मुहैया कराने के लिए विशेष कैंप लगाएं और प्वाइंट ऑफ सेल मशीन लगाने के लिए सभी व्यापारियों से बैंकों के लिए आवेदन हासिल करें.

प्वाइंट ऑफ सेल मशीन पर कोई बुनियादी सीमा शुल्क लागू नहीं है. इसके अलावा इन उपकरणों पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क में भी छूट दी गई है.

इस मशीन को बनाने वाली घरेलू निर्माता कंपनियों को भी सभी आवश्यक माल में 12.5 प्रतिशत उत्पाद शुल्क और 4.0 प्रतिशत विशेष अतिरिक्त शुल्क से मुक्त रखा गया है.

पर सवाल ये है कि क्या इससे बाज़ार की रौनक लौटेगी और अगर जनता ने डिजिटल भुगतान करना शुरू कर भी दिया तो भी इसका दायरा कितना होगा?

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