बाप का घर आप का नहीं

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जब हम-आप बड़े हो रहे थे तो कई बार लड़ाइयों में अक्सर ये सुनने को मिलता था...फलां चीज़ तुम्हारे बाप की है या इस काम में तुम्हारे बाप का क्या जाता है.

इन वाक्यों में छुपा हुआ भाव यही होता है कि जो चीज़ आपके पिता की है वो आपकी है वो भी बिना किसी रोक-टोक के.

भारत में संयुक्त परिवारों और पिछले कुछ दशकों में न्यूक्लियर परिवारों के दौर में भी बाप और बेटे को लेकर शायद ही ये भ्रम रहा है कि जो बाप का है, वो बेटे का अपने आप हो जाता है.

अब हाई कोर्ट ने साफ कह दिया है कि बाप के घर पर बेटे का स्वत: अधिकार नहीं होगा.

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किसी मामले की सुनवाई में दिल्ली हाईकोर्ट ने साफ कहा कि अगर घर बाप के नाम पर है तो बेटा इस पर दावा नहीं कर सकता और अगर उसे घर में रहना है तो वो पिता की दया पर ही संभव है.

ये भारतीय समाज में एक बड़ा फैसला है क्योंकि अभी तक ये ही माना जाता रहा है कि पिता के घर पर बेटे का ही अधिकार होता है.

संपत्ति को लेकर भारतीय कानून

1.पिता की पुश्तैनी संपत्ति में बेटे के साथ-साथ बेटी को भी बराबरी का अधिकार है.

2.पिता जो संपत्ति कमाते हैं उस संपत्ति को किसी को भी देने का अधिकार पिता का होता है.

3.अगर पिता ने वसीयत नहीं बनाई है तो इस संपत्ति पर बेटे-बेटियों का बराबर का हक माना जाएगा.

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