बीबीसी स्पेशल: ख़ुद जैसे मुसलमान तैयार करने का मिशन

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देश से मोहब्बत करना सिखाया गया है

कट्टरपंथी इस्लामी विचारधारा के वहाबी कहलाने वाले मुसलमानों का यक़ीन है कि इस्लाम का सबसे सुनहरा दौर पैग़म्बर मोहम्मद और उनके बाद के चार शासकों का था.

ज़ाकिर नाइक- डोंगरी से दुबई तक

वो उसी दौर में वापस जाने की मांग करते हैं. इस विचारधारा का ये भी मानना है कि एक सच्चा मुसलमान वही है जो इस्लाम की सर्वोच्चता को माने और इसका प्रचार करे.

उन पर इल्ज़ाम है कि इस्लाम की अपनी समझ को वो सर्वश्रेष्ठ मानते हैं.

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Image caption इस्लामिक इंटरनेशनल स्कूल में इस्लाम और धर्मनिरपेक्ष पाठ्यक्रम दोनों चलता है

सालों पहले मुंबई का एक डॉक्टर दक्षिण अफ्रीका के एक इस्लामी प्रचारक अहमद दीदात से मिला. इस मुलाक़ात ने उसकी ज़िंदगी हमेशा के लिए बदल दी.

ज़ाकिर नाइक ने अपने गुरु दीदात की तरह इस्लाम के प्रचार का बीड़ा उठाया.

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'जाक़िर नाइक ग़लत नहीं हैं'

उन्होंने 1991 में इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन (आईआरएफ़) की स्थापना की. अपने भाषणों को आम आदमी तक पहुंचाने के लिए पीस टीवी नाम से टीवी चैनल शुरू किया. इस्लाम का प्रचार-प्रसार करने के लिए स्कूलों की स्थापना की.

एक जुलाई को ढाका में हुए चरमपंथी हमले के बाद ज़ाकिर नाइक सुर्ख़ियों में आ गए. धारणा बनी कि उनके भाषणों से मुस्लिम युवा प्रभावित हो रहे हैं. इनमें से कुछ चरमपंथ के रास्ते पर चल पड़े हैं. हालांकि नाइक इस धारणा को ग़लत बताते हैं.

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Image caption अधिकारियों ने इस्लामिक इंटरनेशनल स्कूल का बैंक अकाउंट बंद किया

पिछले दिनों केंद्र सरकार ने आईआरएफ पर पाबंदी लगा दी. राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने फाउंडेशन और नाइक से जुड़े दूसरे दफ्तरों में छापे माकर उन्हें सील कर दिया.

नाइक ने आईआरएफ़ पर लगी पाबंदी को अदालत में चुनौती देने का फ़ैसला किया है.

आइए जानते हैं कि कितना बड़ा है ज़ाकिर नाइक का साम्राज्य?

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Image caption स्कूल के बच्चे अपने भविष्य को लेकर चिंतित

मुंबई के मज़गांवन इलाक़े में ऊंची दीवारों और बड़े दरवाज़े से घिरे इस्लामिक इंटरनेशनल स्कूल को चलाने वाली संस्था इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन एजुकेशनल ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं ज़ाकिर नाइक.

वो आईआरएफ़ के भी अध्यक्ष हैं. इस पर सरकार ने पाबंदी लगा दी है. स्कूल पर कोई पाबंदी नहीं है. लेकिन स्कूल के बैंक खातों को फ्रीज़ कर दिया गया है.

ज़ाकिर नाइक पर चरमपंथी विचारधारा को बढ़ावा देने और विभिन्न समुदायों के बीच नफ़रत फैलाने का इल्ज़ाम है.

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Image caption इस्लामिक इंटरनेशनल स्कूल की छात्राएं

इस्लामिक इंटरनेशनल स्कूल के बच्चे कहते हैं कि लोगों को उनके स्कूल के बारे में ज़्यादा जानकारी नहीं है.

स्कूल में कैम्ब्रिज इंटरनेशनल बोर्ड - IGCSE पाठ्यक्रम चलता है, जहाँ पढ़ाई अंग्रेजी में होती है. इस स्कूल में इस्लाम की तालीम भी दी जाती है. स्कूल के बच्चे अपने भविष्य को लेकर परेशान हैं

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यह एक नॉर्मल स्कूल है

इस स्कूल की शाखाएं चेन्नई और दुबई में भी हैं. इसे ज़ाकिर नाइक ने अपनी इमेज में ढालने की कोशिश की है.

वो ख़ुद अक्सर अंग्रेजी में भाषण देते हैं और टाई सूट के साथ टोपी लगाते हैं और दाढ़ी रखते हैं. उन्होंने अपनी छवि ऐसी बनाई है कि पारंपरिक और आधुनिक मुसलमानों में उनकी स्वीकृति हो.

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Image caption इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन की एक इमारत

ज़ाकिर नाइक की कमाई फाउंडेशन के ज़रिए बिकने वाली इस्लाम पर लिखी उनकी किताबें और उनके भाषणों की डीवीडी और सीडी से होती है.

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ज़ाकिर नाइक नौजवानों को प्रभावित करते हैं

उन्होंने 1991 में इस्लामिक रिसर्च फाउंडेशन की स्थापना की थी. इसके कुछ साल बाद ही उन्होंने अपने भाषणों को आम आदमी तक पहुंचाने के लिए पीस टीवी की शुरुआत की. इसका मुख्य कार्यालय दुबई में है.

मुंबई के डोंगरी मोहल्ले में आईआरएफ़ के एक दर्जन से भी अधिक दफ़्तर हैं.

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आईआरएफ़ से जुड़ी संस्थाएं समाज सेवा से जुड़ी हुई हैं

पीस चैनल के भारत में प्रसारण पर रोक है. लेकिन दुबई में यह चैनल अभी भी चल रहा है. खाड़ी देशों में इस्लाम फैलाने का उनका काम जारी है.

भाषण देने के लिए वो आज भी अफ्रीका का दौरा कर रहे हैं. लोगों का कहना है कि अगर डॉक्टर ज़ाकिर नाइक भारत नहीं भी लौटे तो भी भारत से बाहर उनका काम चलता रहेगा.

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