भारत-पाक बातचीत होनी चाहिए, पर इसे कमज़ोरी न समझें- बासित

भारत में पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने बीबीसी से बातचीत में कहा है कि भारत के साथ दो-तरफ़ा बातचीत को लेकर कोई प्रोग्राम तय नहीं है, अभी कोई ऐसा संकेत नहीं है.

कुछ ही दिन में अमृतसर में होने वाली 'हार्ट ऑफ़ एशिया कॉन्फ़्रेंस' में पाकिस्तान की ओर से वहां के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज़ अज़ीज़ आने वाले हैं और इसी संदर्भ में उन्होंने दोतरफ़ा बातचीत के मसले पर जवाब दिया.

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अब्दुल बासित को भारत की कई चीज़ें पसंद है जिसमें से एक महिलाओं का सशक्तिकरण भी है

समाचार न्यूज़ एजेंसी एएनआई ने भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप के हवाले से कहा है कि हॉर्ट ऑफ़ एशिया कांफ्रेंस के दौरान द्विपक्षीय वार्ता के लिए पाकिस्तान की तरफ़ से कोई मांग नहीं आई है.

पाकिस्तान के उच्चायुक्त अब्दुल बासित ने बीबीसी हिंदी के फ़ेसबुक लाइव के दौरान ये बातें कही हैं. अब्दुल बासित के साथ पूरी बातचीत का वीडियो आप यहाँ देखें.

पाकिस्तान के उच्चायुक्त का कहना था, "नोटबंदी पर बदकिस्मती से हमें भी काफ़ी दिक्कतें पेश आ रही हैं, हमने भारत के विदेश मंत्रालय से इस बारे में संपर्क साधा है क्योंकि हमार बड़ा मिशन है...कोई हल निकल आएगा."

भारत-पाक सीमा और नियंत्रण रेखा पर हो रही हिंसा के बारे में उन्होंने कहा कि ये पाकिस्तान के हित में नहीं है कि नियंत्रण रेखा पर कोई मुश्किलें पैदा हों.

उनका कहना था कि पाकिस्तान ने तो संयुक्त राष्ट्र में ही सुझाव दिया था कि एलओसे के बारे में कोई स्थायी एग्रीमेंट हो जाए, लेकिन भारत ने कोई जवाब नहीं दिया.

पाकिस्तानी उच्चायुक्त ने आरोप लगाया- "भारत की तरफ़ से हाल में पैसेंजर बस पर फ़ायरिंग में कई लोग मारे गए...अब इन मसलों पर बातचीत तो नहीं हो रही है. हम चाहते हैं कि बातचीत हो. हम भी फ़ायरिंग कर सकते थे, हमारे डीजीएमओ ने पहल की और बातचीत की भारत के डीजीएम से..."

बीबीसी हिंदी के साथ फ़ेसबुक लाइव के दौरान कश्मीर और प्रॉक्सी वॉर के मुद्दे पर उन्होंने कहा, "कोई प्रॉक्सी वॉर नहीं है. मैं समझता हूँ कि जम्मू-कश्मीर को सिर्फ़ दहशतगर्दी के नज़र से नहीं, कश्मीरियों की उमंगों के मसले की तरह देखें. इसका हल ताकत से नहीं, राजनीतिक हल होना चाहिए."

उन्होंने कहा कि उन्हें भारत में मुगलिया ऑर्किटेक्टर, ऑटो और अन्य वाहनों पर बिना रोकटोक लड़कियों का घूमना और दिल्ली में उनके दोस्त बहुत पसंद हैं.

बीबीसी उर्दू से बातचीत के दौरान अब्दुल बासित ने कहा, "अभी कोई दो-तरफ़ा मुलाकात तय नहीं है. हम चाहते हैं कि जो बातचीत हो उसका नतीजा निकले. जहाँ तक शर्त की बात है, तो हमारी तरफ़ से भी शर्त हो सकती है कि जब तक पाक में दहशतगर्दी जारी है तब तक भारत से बातचीत नहीं हो सकती. मतभेद बातचीत से ही दूर हो सकते हैं, शर्तें तो हम भी लगा सकते हैं, कश्मीर पर, सियाचिन पर... "

उनका कहना था, "बुनियादी फ़ैसला करना है कि हम इस पैटर्न से निकलें, एक कदम आगे, दो पीछे.....इससे बाहर निकलना है. हम जो हर रोज़ कहते हैं कि हमें बात करनी है, उसे हमें कमज़ोरी न समझें. शायर ने कहा है- ...पानी को अब तो सर से गुज़र जाना चाहिए, कुछ फ़ैसला अब तो हो जाना चाहिए."

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