'सेना के रूटीन पर विवाद पॉलिटिकल फ्रस्ट्रेशन'

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भारत के रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर के कहा है कि पश्चिम बंगाल में टोल नाकों पर सेना की तैनाती पर राज्य की तृणमूल कांग्रेस सरकार विवाद खड़ा कर रही है, जो ग़लत है.

लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने बंगाल में कई ज़िलों में सैनिक तैनात करने का मुद्दा उठाया और सरकार से इस बारे में जवाब मांगा.

पर्रिकर ने कहा कि पिछले कई सालों से यह एक्सरसाइज़ की जा रही है. इस साल उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड में ऐसी एक्सरसाइज़ की गई है और अभी यह पश्चिम बंगाल में हो रहा है.

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में राज्य सचिवालय के पास और कई और जगहों पर सेना की तैनाती पर राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ख़फ़ा हैं. उनका आरोप है कि राज्य सरकार को बताए बिना सेना तैनात कर दी गई है.

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इस आरोप के बाद मुद्दा गरमाया और सोशल मीडिया पर छाया रहा. सेना के पूर्वी कमान ने इस पर सफाई दी और ट्वीट कर कहा कि ये "कार्रवाई एक रूटीन गतिविधि है और पश्चिम बंगाल की पुलिस की जानकारी में इसे किया जा रहा है".

पर्रिकर ने लोकसभा में कहा है, "पिछले 15-20 सालों से ये एक्सरसाइज़ की जाती रही है और साल 2015 में पश्चिम बंगाल में 19 से 21 नवंबर के बीच यह एक्सरसाइज़ हुई थी. इस साल भी ये 28 से 29 नवंबर के बीच की जानी थी. लेकिन पुलिस के सुझाव के बाद इसकी तारीख 1-2 दिसंबर की गई थी."

उन्होंने कहा कि इस एक्सरसाइज़ के दौरान यातायात से जुड़ी समस्या न हो इसके लिए पुलिस के साथ सेना ने साझा अभ्यास भी किया था.

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उन्होंने ममता बनर्जी पर इस पर विवाद खड़ा करने का आरोप लगाया और कहा, "दुख है कि उन्होंने सेना के रूटीन को कंट्रोवर्सी बना लिया गया है, यह ग़लत है. ये केवल पॉलिटिकल फ्रस्ट्रेशन है."

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इससे ठीक एक दिन पहले तृणमूल कांग्रेस ने ममता बनर्जी की सुरक्षा को लेकर संसद के दोनों सदनों में हंगामा किया था. पार्टी का आरोप था कि जानबूझ कर उस विमान को ख़तरे में डालने की कोशिश की गई जिसमें ममता बनर्जी सवार थीं.

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