'बंगाल में तख़्तापलट क्यों करेंगे?' ममता पर जनरल मलिक

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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा है कि सूबे की सरकार को बिना बताये पश्चिम बंगाल सचिवालय और कई ज़िलों में सेना की तैनाती की गई है.

तृणमूल कांग्रेस के राज्य सभा सदस्य डेरक ओ ब्राइन ने एक ट्वीट में इसे 'गृह युद्ध' शुरु करने की कोशिश बताया. पार्टी ने कहा है कि सूबे में सेना की तैनाती 19 जगहों पर की गई है.

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तृणमूल कांग्रेस नेता का सेना वाला आरोप उस घटना के बाद आया है जिसमें उनकी पार्टी ने आरोप लगाया था कि तेल ख़त्म हो जाने के बाद भी उस विमान को लैंडिग की इजाज़त देने में देरी की गई जिसमें पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री सफ़र कर रही थी. घटना को राज्य के मंत्री फिरहाद हकीम ने अंग्रेज़ी अख़बार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक़ 'ममता बनर्जी के ख़त्म करने की साज़िश' बताया.

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सूबे में सेना की तैनती को बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने भारतीय संघीय ढांचे पर हमला बताया है.

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सवाल ये किन स्थितियों में सेना को राज्यों में तैनात किया जाता है, और इस मामले में क्या नियमों का पालन हुआ?

ममता बनर्जी पूछ रही हैं पुलिस के ऐतराज़ के बावजूद सेना टोल प्लाज़ा पर क्या कर रही थी, राज्य सचिवालय के सामने क्यों खड़ी थी और जलपाइगुड़ी, अलीपुरदुआर, दार्जिलिंग, बरकपुर, नॉर्थ24 परगना, हावड़ा, हुगली, कोलकाता, मुर्शीदाबाद और बर्दवान में भी सेना को तैनात किया गया है?

लेकिन पूर्व सेना प्रमुख जनरल वीपी मलिक ने आरोपों को बेहूदा बताते हुए कहा है कि अगर तख्तापलट करना होगा तो कोई पश्चिम बंगाल में क्यों करेगा.

दरअसल पूरे मामले में हुआ क्या? इसे लेकर सवाल हैं.

सेना के पूर्वी कमांड ने कहा है कि वो पश्चिम बंगाल पुलिस की पूरी जानकारी और उनके तालमेल के साथ रूटीन अभ्यास कर रही थी और ये कहना कि उसने टोल प्लाज़ा पर कब्ज़ा कर लिया, ये ग़लत है.

रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने संसद में कहा कि जुड़े हुए अधिकारियों के इस अभ्यास के बारे में जानकारी थी.

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कब तैनाती

पूर्व कैबिनेट सचिव टीएसआर सुब्रमणियम के मुताबिक़ सेना को उस वक्त स्थानीय प्रशासन को जानकारी देनी होती है जब राज्य के अनुरोध पर सेना को क़ानून व्यवस्था, बाढ़, दंगों जैसी स्थितियों से निपटने के लिए बुलाया जाता है या केंद्र सरकार के कहने पर सेना को तैनात किया जाता है तब राज्य सरकार की सहमति की ज़रूरत होती है.

वो कहते हैं, "जब मैं उत्तर प्रदेश का मुख्य सचिव था, तो किसी ने मुझे नहीं बताया जब सेना एक जगह से दूसरी जगह जाती थी."

वो कहते हैं, "सैन्य गतिविधि की जानकारी केंद्र सरकार को दी जाती है. जहां सेना राज्य पुलिस के साथ कोई अभ्यास करती है तब राज्य को जानकारी दी जाती है. नहीं तो ये रूटीन मामला होता है."

42 साल तक सेना में रहे और तीन वर्ष तक भारतीय सैन्य प्रमुख रहे जनरल वीपी मलिक के मुताबिक़ सैन्य अभ्यास की जानकारी प्रशासन को दी जाती है और यह इजाज़त नहीं विचार विमर्श के आधार पर होता है.

वो कहते हैं, "अगर राज्य सरकार में किसी को ऐतराज़ था, तो क्या गृह सचिव या मुख्य सचिव को सेना मुख्यालय फ़ोन करके बात नहीं करनी चाहिए थी कि ये क्या हो रहा है. ये पूरा मामला तमाशा बनता जा रहा है. ये राजनीतिक मामला बन गया है."

उन्होंने बताया कि विभिन्य परिस्थितियों को समझने के लिए लगातार प्रदेश सरकार और स्थानीय मिलिट्री हेडक्वार्टर संपर्क में रहते हैं और मामले पर सालाना कान्फ्रेंस भी होती है.

वो कहते हैं, "हम कई बार अभ्यास करते हैं, बॉर्डर इलाकों में ट्रेनिंग देते हैं. अगर मुझे राज्य में एक जगह से दूसरी जगह जाना हो तो आप कहेंगे कि आपने अनुमति नहीं ली. इसका मतलब है कि मैं कैंटोनमेंट से हिल ही नहीं सकता. मैंने आज तक ऐसी बात नहीं सुनी. हम जो अभ्यास करते हैं, वो प्रशासन को बताकर करते हैं. उसके लिए हमारी संस्थाएं भी हैं. अगर अभ्यास हुआ है तो उन्होंने बताया तो ज़रूर किया होगा."

वो कहते हैं, "कहीं न कहीं गड़बड़ी हुई है और इसके लिए मैं राज्य सरकार को दोषी ठहराता हूं. ये आपकी सेना है, ये कोई विदेशी सेना नहीं है."

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टोल प्लाज़ा पर क्या हुआ

सेना के पूर्वी कमांड ने इसे गाड़ियों की आवाजाही की संख्या की जानकारी को इकट्ठा करने वाली प्रक्रिया बताया और कहा कि ये कहना कि उसने टोल प्लाज़ा पर कब्ज़ा किया, ग़लत है और सभी उत्तर पूर्वी प्रदेशों में इस तरह के रूटीन अभ्यास होते रहते हैं.

गुवहाटी में सेना प्रवक्ता लेफ़्टिनेंट सुनीत न्यूटन के अनुसार सेना अंदाज़ा लगाती है कि किसी आकस्मिक स्थिति में इलाक़े में सेना का मूवमेंट कैसे होगा.

जनरल मलिक के अनुसार, "इस मामले में मुझे लगता है कि पुलिस को भी बुलाना चाहिए था. कहीं कुछ गड़बड़ी हुई है लेकिन उसे इस स्तर पर उठाना, ये बेहूदा है. ऐसा लगता है कि राज्य स्तर का अभ्यास था."

उधर टीएसआर सुब्रमण्यम कहते हैं, "टोल प्लाज़ा पर सेना क्या कर रही थी, मुझे नहीं पता लेकिन ये स्वतंत्र देश है. सेना की ड्रिल्स देश भर में होती हैं. ऐसा वक्तव्य विचित्र है."

तख़्तापलट की कोशिश?

जनरल मलिक के मुताबिक़ सैन्य तख़्तापटल की बात करना बकवास है.

उन्होंने कहा, "अगर किसी को तख़्तापटल करना है तो वो पश्चिम बंगाल में क्यों करेगा! हम सेना के साथ खेल रहे हैं. लोग ये जानबूझकर कर रहे हैं."

टीएसआर सुब्रमण्यम कहते हैं, "ये स्वतंत्र देश है. सेना एक जगह से दूसरी जगह कभी भी जा सकती है. तख्तापलट बंगाल में नहीं होगा. ऐसा विजय चौक में होगा."

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