कभी चाय भी बेचा करते थे पनीरसेल्वम

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ओ पनीरसेल्वम मंगलवार रात अचानक राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता की समाधि पर पहुंचे. वहां उहोंने आधे घंटे से अधिक समय तक ध्यान लगाया.

इसके बाद उन्होंने कहा कि उन्हें अन्नाद्रमुक विधायक दल के नेता का पद और मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ने के लिए मजबूर किया गया.

सौम्य पनीरसेल्वम का सख्त वार

पार्टी महासचिव और विधायक दल की नई नेता शशिकला ने इसे बगावत के रूप में देखा और उन्हें पार्टी कोषाध्यक्ष पद से हटा दिया. इसके बाद अब राज्य की राजनीति में अटकलों का दौर शुरु हो गया है.

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जयललिता के निधन के बाद ओ पनीरसेल्वम ने मुख्यमंत्री का पद संभाला था.

पनीरसेल्वम को एआईएडीएमके के कोषाध्यक्ष पद से हटाया गया

जब उन्हें ये ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी तो शायद ही किसी को इस पर हैरानी हुई हो.

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चार बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री रहीं जयललिता का निधन

वे पहले भी दो बार जयललिता के जेल जाने की स्थिति में राज्य की कमान संभाल चुके हैं.

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68 साल की जयललिता 22 सितंबर से अपोलो अस्पताल में भर्ती थीं.

जयललिता के वफादार पनीरसेल्वम

दरअसल पनीरसेल्वम जयललिता के सबसे वफ़ादर सहयोगी माने जाते रहे हैं.

65 साल के पनीरसेल्वम के बारे में कुछ बातें सत्ता के गलियारों में लंबे समय से कही सुनी जाती रही हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तरह पनीरसेल्वम ने भी चाय बेची है औऱ उनके पिता भी पार्टी के वफादार थे.

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पनीरसेल्वम के पिता अन्नाद्रमुक के संस्थापक स्वर्गीय एमजी रामचंद्रन के लिए काम करते थे और एमजीआर तभी से उन पर मेहरबान थे.

यहां तक कि पनीरसेल्वम के भाई आज भी पेरियाकुलम में चाय की दुकान चलाते हैं. हालांकि उनका पारिवारिक पेशा खेतीबाड़ी का है.

पनीरसेल्वम के बारे में ये कहा जाता है कि चाय की दुकान से फुरसत निकालकर उन्होंने ग्रैजुएशन की पढ़ाई की और ये बात एमजीआर को भी पता थी.

पनीरसेल्वम पहली बार शशिकला के रिश्तेदार टीटीके दिनाकरन के जरिए जयललिता की नज़र में आए.

कहा जाता है कि मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए पनीरसेल्वम कभी भी उस कुर्सी पर नहीं बैठे जिस पर जयललिता बैठा करती थीं.

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पनीरसेल्वम थेवर समुदाय से आते हैं जिनका दक्षिणी तमिलनाडु में अच्छा प्रभाव माना जाता है.

वे राज्य विधानसभा में थेनी जिले के बोडीनयाकनूर निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं.

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