जब जयललिता बीबीसी इंटरव्यू में भड़क उठीं

एक अक्टूबर 2004 को बीबीसी वर्ल्ड पर सिरीज़ 'हार्ड टॉक इंडिया' के तहत जयललिता का इंटरव्यू किया गया.

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बीबीसी वर्ल्ड के कार्यक्रम हॉर्ड टॉक के लिए करण थापर ने जयललिता का इंटरव्यू किया था.

इस कार्यक्रम में भारत के नामी लोगों से मुश्किल सवाल किए जाते थे. ऐसे ही एक कार्यक्रम में बेटिंग के आरोपों का सामना कर रहे कपिल देव रो पड़े थे. जयललिता का इंटरव्यू मशहूर पत्रकार करण थापर ने किया था जो अपने सख्त अंदाज़ के लिए मशहूर हैं. नरेंद्र मोदी ने उनके साथ एक इंटरव्यू बीच में ही छोड़ दिया था.

जयललिता के साक्षात्कार में जहां करण थापर लगातार जयललिता के सामने एक के बाद एक मुश्किल सवाल रखते रहे, 23 मिनट के इस साक्षात्कार में जैसे-जैसे वक्त बीतता रहा, जयललिता का रुख कड़ा होता गया.

आखिर में जयललिता ने करण थापर से हाथ मिलने से इनकार कर दिया और कहा उन्हें करण से बात करके कोई खुशी नहीं हुई.

उस साक्षात्कार से तीन महीने पहले जयललिता की पार्टी लोकसभा चुनाव में एक भी सीट जीतने में नाकामयाब रही थी.

करण थापर ने बताया कि जब वो इंटरव्यू के लिए कमरे में पहुंचे तो कमरा बेहद ठंडा था और उनकी टीम ठिठुर रही थी. वो कहते हैं, "मैंने नम्रता के साथ कमरे का तापमान बढ़ाने को कहा तो हमसे कहा गया, अम्मा ऐसा ही चाहती हैं. फिर मैंने देखा कि टेबल पर एक बड़ा सा फूलों का गुलदस्ता रखा हुआ है. इसका मतलब होता कि मुझे जयललिता नज़र नहीं आतीं.

"अधिकारियों ने कहा, अम्मा ऐसा चाहती हैं. मैंने उसे खुद ही हटा दिया, एक स्टूल मंगाया और गुलदस्ते को उस पर रख दिया. इस पर अधिकारी नाराज़ भी हुए. जब वो आईं तो मैंने उनसे मज़ाकिया अंदाज़ में कहा कि मुझे नहीं लगता कि एक खूबसूरत महिला और मेरे बीच फूल क्यों आएं. वो इस पर मुस्कुराईं."

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साक्षात्कार की शुरुआत अच्छे से हुई. पहले सवाल के जवाब में जयललिता मुस्कुराईं और बेहतरीन अंग्रेज़ी में हार के कारणों का जवाब दिया. सब कुछ ठीक चल रहा था, तभी माहौल थोड़ा खट्टा होने लगा.

लंदन में इस सिरीज़ के प्रोड्यूसर परवेज़ आलम का मानना है कि माहौल शायद तब बदला जब करण ने जयललिता को टोका कि वो अपने सामने मेज़ पर रखे कागज़ की तरफ़ क्यों देख रही हैं. जयललिता के सामने कुछ नोट्स रखे हुए थे.

परवेज़ आलम कहते हैं, "इसका वो बुरा मान गईं. उन्होंने कहा कि मैं पढ़ नहीं रही हूं, मैं आपकी आंखों में देखकर बात कर रही हूं. आपके सामने भी तो कागज़ रखे हैं, आप भी पढ़ रहे हैं. करन ने कहा, मेरे सामने सवाल हैं. तभी इंटरव्यू का मज़ा किरकिरा होने लगा. आख़िर में वो माइक निकालकर चली गईं."

उधर करण थापर के अनुसार उन्हें ठीक से याद नहीं कि गड़बड़ी कहां शुरू हुई लेकिन "ये उस वक्त हुआ जब मैंने उनसे पूछा कि लोग आपके कदमों में क्यों गिर जाते हैं. जयललिता ने कहा कि उन्होंने लोगों से ऐसा करने से मना किया है. जब मैने पूछा कि लोग ऐसा अभी भी कर रहे हैं तो जयललिता ने कहा कि ये भारतीय सभ्यता है."

टीम पर दबाव था कि इस इंटरव्यू को दोबारा शूट किया जाए. करण थापर के अनुसार इसकी कोई ज़रूरत नहीं थी. लेकिन जब आप कमरे में वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों से घिरे हों तो आप दबाव में आ सकते हैं.

करण थापर के मुताबिक़ उनसे इंटरव्यू को दोबारा करने के लिए कई बार कहा गया लेकिन उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वो बीबीसी से बात करेंगे. वो कहते हैं, "मैंने लंदन फ़ोन करके कहा कि ये इंटरव्यू दोबारा नहीं करना चाहिए क्योंकि ये अच्छा है, हालांकि ये तनाव भरा है और जयललिता इससे खुश नहीं हैं. लंदन ने फ़ैसला किया कि हम इसे दोबारा नहीं करेंगे. हमारे पास लगातार संदेश आ रहे थे लेकिन हमने नम्रतापूर्वक मना कर दिया."

अपना सामान समेटने में करण थापर की टीम को एक घंटे लग गए और ये एक घंटे बेहद तनावपूर्ण थे.

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68 साल की जयललिता 22 सितंबर से अपोलो अस्पताल में भर्ती थीं.

करण थापर 12 साल पुरानी घटना को याद करके कहते हैं कि वो बेहद मुश्किल था "क्योंकि वो बहुत आक्रामक थीं जैसे जैसे वक्त बीतता गया, माहौल और ख़राब होता गया."

क़रीब दो साल बाद नेशनल इटग्रेशन काउंसिल की एक बैठक में करण थापर उड़ीसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से बात कर रहे थे. करण थापर बाद में ख़त्म कर दी गई इस काउंसिल के सदस्य थे.

करण को लगा कि जयललिता नवीन पटनायक से बात करने आ रही हैं. वो किनारे हट गए.

करण बताते हैं, "इस पर वो बोलीं, आप कहां जा रहे हैं करण, फिर बोलीं, मैं नवीन पटनायक से कभी भी बात कर सकती हूँ, मैं आपसे बात करने आई हूं. मैंने कहा, क्या आप हमारी पुरानी मुलाक़ात भूल गई हैं. वो बोलीं, हां बिल्कुल, क्या अगली मुलाक़ात का वक्त नहीं हो गया है? फिर वो मुड़ीं और नवीन पटनायक से बात करने लगीं. मुझे विश्वास है उन्होंने ऐसा जानबूझकर किया लेकिन शिष्टता और खूबसूरती से. मैं चुपचाप निकल गया."

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चार बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री रहीं जयललिता का निधन

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