जयललिता: 27 रुपए तनख़्वाह में 28 किलो सोना और 800 किलो चांदी की कहानी

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भारतीय राजनीति में जे जयललिता का क़द क्या है, इसका इल्म पहले भी था और उनके निधन पर भी साफ़ हो गया.

लेकिन इस ताक़तवर नेता का सियासी सफ़र भ्रष्टाचार के धब्बों से दाग़दार रहा.

भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने 1996 में आय के ज्ञात स्रोतों से ज़्यादा संपत्ति को लेकर जयललिता के ख़िलाफ़ मोर्चा खोला, तो तत्कालीन डीएमके सरकार ने उनके ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज कराने में ज़्यादा देर नहीं लगाई.

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जयललिता पर पांच साल के भीतर 66 करोड़ रुपए की अवैध संपत्ति जुटाने का गंभीर आरोप लगा और मामला निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा.

कई किलो सोना-चांदी, सैकड़ों जूते और हज़ारों साड़ी

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पुलिस के मुताबिक़, जयललिता के निवास पर छापे के दौरान 800 किलो चांदी, 28 किलो सोना, 750 जोड़ी जूते, 10,500 साड़ी, 91 घड़ियां और 41 एयरकंडिशनर मिले थे.

जयललिता और उनके क़रीबियों पर 1991 से 1996 के बीच 32 कंपनियां बनाने का इल्ज़ाम भी लगा.

अदालत में ये आरोप भी लगाया गया था कि जयललिता के 36, पोज़ गार्डन स्थित आवास पर 12 वाहन इस्तेमाल होते थे, जिनकी ज़िम्मेदारी संभालने के लिए छह ड्राइवर मौजूद रहते थे.

एक रुपया तनख़्वाह लेती थीं अम्मा

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कर्नाटक के सरकारी वक़ील और वरिष्ठ अधिवक्ता बी वी आचार्य हाल तक उन्हें बरी करने के फ़ैसले के ख़िलाफ़ दलीलें दे रहे थे.

आचार्य ने सुप्रीम कोर्ट में सवाल उठाया था कि साल 1991 से 1996 के बीच 27 महीनों तक वो प्रतिमाह एक रुपया वेतन ले रही थीं, ऐसे में उनके पास करोड़ों रुपए कहां से आए.

सितंबर, 2014 में निचली अदालत ने जयललिता, शशिकला, इलावारसी और सुधाकरण को दोषी पाया था.

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सज़ा काटने के लिए चारों को बैंगलुरु के प्रपन्ना अग्रहरा जेल भेज दिया गया. हालांकि, जेल पहुंचने के बीस दिन बाद उन्हें सुप्रीम कोर्ट से ज़मानत मिल गई.

मई, 2015 में कर्नाटक हाई कोर्ट ने उन्हें भ्रष्टाचार के सभी आरोपों से बरी कर दिया और वो एक बार फिर मुख्यमंत्री के पद पर लौट आई.

बरी करने के फ़ैसले पर सवाल उठाते हुए बी वी आचार्य ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि प्रिवेंशन ऑफ़ करप्शन एक्ट के प्रावधानों के मुताबिक़ आय के स्रोत साबित करने का भार उस पर होता है, जिस पर आरोप लगता है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ.

113 करोड़ रुपए जायदाद का ख़ुलासा

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हालांकि, अप्रैल 2015 में जयललिता ने ख़ुद हलफ़नामा दाख़िल कर 113.73 करोड़ रुपए जायदाद का ख़ुलासा किया था. इसमें तीन करोड़ से ज़्यादा रक़म की चांदी शामिल थी.

66 करोड़ की अवैध संपत्ति से जुड़े मामले में उन्हें बरी करने का फ़ैसला सही था या ग़लत, ये बहस अब कोई मायने नहीं रखतीं.

अगर पुलिस को छापे में वाक़ई इतने बेशक़ीमती सामान मिले थे, तो इन्हें ख़रीदने की रक़म कहां से आई.

बतौर मुख्यमंत्री वेतन में एक रुपया लेने वालीं जयललिता के पास सोना-चांदी, इतनी साड़ियां और जूतियां कैसे पहुंचीं, इस तरह के सभी सवाल और इनके जवाब अब अम्मा के साथ ही चले गए हैं.

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