'बाबा साहेब अंबेडकर से मिली प्रेरणा'
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सफ़ाईकर्मी में यहां जन्मे विमल ने पीएचडी की

मुझे आज भी याद है वो दिन, जब मैं स्कूल के लिए निकला तो बच्चे चिल्ला रहे थे चुराह-चुराह आ गया.

मैंने घर आकर अपनी मां से पूछा कि चुराह क्या होता है, तो उन्होंने मुझसे कहा कि उन बातों पर ध्यान मत दे, अपना काम करो. लेकिन मुझे समझ में आ गया था कि ये मुझे चिढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है, ख़राब शब्द है और गैर क़ानूनी भी है.