ये हर दिन एक किलो बालू खाती हैं

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15 साल की कुसमावती को जब पेट दर्द हुआ तो एक वैद्य ने उन्हें गाय के दूध में बालू मिलाकर पीने को कहा.

कुसमावती की परेशानी तो ठीक हो गई. मगर बालू में न जाने कैसा स्वाद था कि कुसमावती को उसकी लत लग गई.

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वाराणसी के चोलापुर ब्लॉक के कटारी गांव की कुसमावती आज 78 साल की हैं और 63 साल पुरानी उनकी लत अभी भी जारी है.

(इस ख़बर का मकसद केवल जानकारी देना है. किसी को ऐसा करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए, क्योंकि इसके सेवन से शरीर पर असर की बीबीसी को कोई मेडिकल जानकारी नहीं है)

कुसमावती की शादी हुई, फिर दो बेटे और एक बेटी हुए, मगर हर दिन बालू फांकने का सिलसिला जारी रहा.

अब उनके पोते-पोती भी हो चुके हैं और उनकी ज़िम्मेदारी है दादी के लिए बालू जुटाना. कई बार तो पड़ोसी भी उन्हें बालू दान में दे देते हैं.

कुसमावती पूरी तरह सेहतमंद हैं. न आखों पर चश्मा, न झुकी कमर.

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कुसमावती को जब पेट दर्द हुआ तो एक वैद्य ने उन्हें गाय के दूध में बालू मिलाकर पीने को कहा.

और तो और खेतीबाड़ी का काम भी करती हैं, जैसे खरपतवार, धान, गेहूँ की कटाई, गन्ना छीलना, चारा काटना और 20 किलो का बोझ उठाकर मुर्गियों को खिलाना.

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कुसुमावती दावा करती हैं कि दिनभर में वह ढाई सौ ग्राम से एक किलो तक बालू खा लेती हैं. खाने के पहले वह बाक़ायदा उसे धोती हैं, धूप में सुखाती हैं और कंकड़-पत्थर भी बीनती हैं. सोने से पहले और उठने के बाद और नींद टूटने पर भी उन्हें बालू चाहिए और जिस दिन तलब लगे तो पूरा दिन ही बालू फांकते बीतता है.

उन्होंने हमें एक क़िस्सा भी सुनाया, ''एक बार पड़ोस में मकान बनाने के लिए बालू आया हुआ था. मुझे आज तक वैसा मीठा बालू पूरे जीवन में खाने को नहीं मिला. कुछ ही दिन में मैंने दो-तीन बोरे बालू खा लिए. किसी को पता नहीं चला क्योंकि उनके बदले मैं अपने घर में रखे बालू को वहां रख आती थी.''

कुसमावती के पोते सुंदरम ने बताया, "मैं तो बचपन से ही देख रहा हूँ कि मेरी दादी बालू खाती हैं. और वह पूरी तरह ठीक हैं. सिर्फ़ पिछले साल दादी एक बार बीमार पड़ी थीं."

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काशी हिंदू विश्वविद्यालय के मनोरोग चिकित्सा विभाग के अध्यक्ष प्रो. संजय गुप्ता का मानना है, "यह "पाइका" नाम की बीमारी का ही रूप है जिसमें न खाने वाली चीज़ें भी इंसान खाने लगता है. वह बीमार नहीं होतीं तो शायद इसलिए क्योंकि बालू के ज़रिए वह अपने शरीर में किसी कमी को पूरा करती हैं.''

उन्होंने स्वीकार किया कि मेडिकल सांइस में बहुत सारी अनसुलझी पहेलियां अभी भी हैं जिनमें से एक कुसमावती का केस भी है.

लेकिन उन्होंने ये भी बताया कि चिकित्सीय तौर पर बालू खाने की लत से शरीर को नुकसान होने की आशंका बनी रहती है, तो आप कुसमावती की लत की नकल मत कीजिएगा.

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