शशिकला के 'अम्मा' की पार्टी की महासचिव बनने की राह लगभग साफ़

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तमिलनाडु में एआईएडीएमके पार्टी की सभी शाखाओं ने एकमत से वीके शशिकला को पार्टी की महासचिव बनाने का प्रस्ताव पारित किया है.

पूर्व मंत्री और पार्टी के आयोजक सचिव सी पुन्नयन ने बीबीसी को बताया, ''पार्टी की 64,000 युनिट्स, जिसमें विभिन्न स्तर जैसे पंचायत और ज़िला समितियों के सचिव शामिल हैं, सभी ने शशिकला को महासचिव का पद स्वीकार करने के लिए प्रस्ताव पारित किया है.''

फ़िलहाल ये शशिकला पर निर्भर है कि वो इस पर क्या प्रतिक्रिया देती हैं.

इससे कुछ दिन पहले पार्टी के कुछ काडर की ओर से शशिकला के नाम का विरोध होने की बात सामने आई थी.

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पुन्नयन ने बीबीसी को ये भी कहा , ''शशिकला ने अभी तक पार्टी की इस मांग पर प्रतिक्रिया नहीं दी है.''

उनका कहना था, ''जैसे ही वे ज़िम्मेदारी संभालने के लिए तैयार हो जाती हैं हम एआईएडीएम की जनरल काउंसिल की बैठक बुलाएंगे और उनके नाम की घोषणा करेंगे, क्योंकि उनका कोई प्रतिद्धंदी नहीं है.''

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लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों की शशिकला के पार्टी संभालने की क्षमता पर को लेकर अलग अलग राय है.

जयललिता ने पार्टी को चलाया और उनके ख़िलाफ़ कभी विरोध की आवाज़ नहीं उठी. शशिकला के पार्टी की कमान संभालने की राह लगभग साफ़

ये आमतौर पर कहा जाता है कि ''वे एक ब्रहामण थीं जिन्होंने एक ब्रहामण-विरोधी द्रविड पार्टी को पूरे आत्मविश्वाश के साथ चलाया.''

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राजनीतिक विश्लेषक जी सत्यामूर्ति कहते हैं, ''शशिकला के बारे में राजनीतिक तौर पर ज़्यादा कुछ पता नहीं है. उन्हें न तो पार्टी काडर से बात करते हुए देखा गया है और न ही उन्होंने कभी किसी पार्टी बैठक को संबोधित किया है.''

सत्यामूर्ति का मानना है कि जैसे ही शशिकला पद संभालेंगी उनकी परीक्षा शुरू हो जाएगी, क्योंकि इससे पहले इस पद पर एमजीआर और जयललिता रह चुके हैं.

उनका कहना है, ''तभी पार्टी में गौंडर समुदाय अपना प्रभाव दिखाना शुरू कर देगा क्योंकि पश्चिमी तमिलनाडु में गौंडर समुदाय बहुमत में है और उन्होंने पार्टी के पक्ष में मतदान किया था. गौंडर समुदाय के पांच मंत्री हैं. वहीं थेवर समुदाय के मंत्रिमंडल में नौ मंत्री है.''

लेकिन फ्रंटलाइन मैगज़ीन के पत्रकार और विश्लेषक आरके राधाकृष्णन, सत्यामूर्ति से सहमत दिखते हैं.

राधाकृष्णन का कहना है, '' शशिकला हमेशा शांतिपूर्ण तरीके से पर्दे के पीछे से काम करती रही हैं लेकिन इस बात को भी नहीं भूलना चाहिए कि पिछले डेढ़ साल से, जब से जयललिता की तबीयत को लेकर बातें सामने आ रही थीं, उस दौरान शशिकला ही पार्टी और सरकार को चला रही थीं.''

उनका कहना है, ''हालांकि आम लोग भी ये नहीं जानते कि फैसले कौन ले रहा था. लेकिन एक बात ये भी है कि अभी तक कोई भी फैसला गलत नहीं हुआ है. तो ये भी स्पष्ट है कि उन्होंने ही पार्टी और सरकार को चलाया है और वो पार्टी के विभिन्न तबकों को स्वीकार्य हैं.''

इतनी जल्दबाज़ी में शशिकला को पार्टी महासचिव बनाने के दो कारण हैं, एक तो ये कि चुनाव आयोग के नियमों के अनुसार पार्टी को 31 दिसंबर से पहले पार्टी की जनरल काउंसिल की बैठक करनी होगी.

राधाकृष्णन का कहना है, "दूसरा ये कि एआईएडीएमके दिखाना चाहती है कि राज्य में सत्ता के दो केंद्र नहीं हैं. राज्य के मुख्यमंत्री ओ पनीरसेल्वम हैं, तो पार्टी स्पष्ट करना चाहती है कि महासचिव के तौर पर शशिकला पार्टी का नेतृत्व करेंगी.''

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