जयललिता की भतीजी के पीछे कौन!

इमेज कॉपीरइट Imran Qureshi
Image caption जयललिता के पार्थिव शरीर के पास दीपा जयकुमार

जयललिता ने न तो कोई वसीयत छोड़ी और न ही किसी को अपना सियासी वारिस बनाया. इसलिए ज़ाहिर है कि उनकी विरासत का सवाल विवादों में फंस जाएगा. इसमें राजनीतिक विरासत से लेकर और जायदाद तक का सवाल शामिल है.

उन्होंने परिवार के किसी व्यक्ति का नाम भी नहीं लिया और न ही किसी ट्रस्ट की कभी बात की और न ही पार्टी के लिए उत्तराधिकार छोड़ने की कोई चर्चा की. इसलिए इस मामले का विवादों में पड़ना तो तय है.

पढ़ें- शशिकला की राह में जयललिता की भतीजी?

पढ़ें- अन्नाद्रमुक में 'अम्मा' की जगह भर पाएंगी शशिकला?

लोगों को ये पता तो था कि जयललिता का एक परिवार है लेकिन इतने सालों में तो उनका कभी ज़िक्र नहीं हुआ.

इमेज कॉपीरइट AP
Image caption अन्नाद्रमुक ने शशिकला को पार्टी की कमान सौंप दी है.

लेकिन जयललिता की भतीजी दीपा जयकुमार जिस ढंग से मीडिया में लगातार इंटरव्यू दे रही हैं और शशिकला की भूमिका के बारे में सवाल उठा रही हैं, ऐसा लग रहा है कि उन्हें किसी की शह हासिल है. कोई है जो उनके पीछे है.

इस वक्त शशिकला जब अपनी स्थिति को मज़बूत करने में लगी हैं तो उन्हें दी जा रही चुनौती से ऐसा लगता है कि दीपा को कुछ ताक़ेतें पीछे से समर्थन दे रही हैं. इस लिहाज़ से तमिलनाडु की राजनीति एक दिलचस्प मोड़ पर खड़ी है.

पढ़ें- एआईएडीएमके चाहती है कि शशिकला संभाले कमान

पढ़ें- 'जयललिता के बाद शशिकला ही हैं...'

जहां तक जयललिता की संपत्ति की बात है तो उस पर दावा उनके परिवार का बनता है. यह तो सभी जानते हैं कि दीपा के पिता जयकुमार जयललिता के सगे भाई थे. जयललिता की भाभी चेन्नई में रहती हैं.

इमेज कॉपीरइट KASHIF MASOOD
Image caption शशिकला

इस हिसाब से जयललिता की संपत्ति पर क़ानूनी तौर पर उनके परिवार का ही दावा बनता है. हालांकि जयललिता के घर पोएस गार्डन में फ़िलहाल शशिकला का डेरा है और पार्टी ने उन्हें अपना महासचिव भी घोषित कर दिया है.

सवाल उठता है कि शशिकला के लिए यह सियासी तौर पर कितना आसान है. इसमें शक़ नहीं है कि शशिकला की राह कई चुनौतियां हैं. अन्नाद्रमुक की पूरी राजनीति ही जातीय समीकरणों पर टिकी है. यहां तक कि तमिलनाडु की पूरी राजनीति पर ही जातिवाद हावी है.

पढ़ें- एमजीआर के बगल में दफ़न हुई जयललिता

पढ़ें- जयललिता के बाद पार्टी को मज़बूत नेतृत्व कौन देगा?

अन्नाद्रमुक में थेवर और गाउंडर समुदाय हावी है. इनके अलावा पार्टी में दलितों का भी प्रभाव है. इस समय थेवर समुदाय के ही पनीरसेल्वम मुख्यमंत्री और शशिकला पार्टी की प्रमुख हैं. लेकिन यह कोई स्थाई समाधान नहीं है.

इमेज कॉपीरइट Deepa Jayakumar
Image caption भाई जयकुमार की शादी में जयललिता.

गाउंडर समुदाय के विधायक भी आने वाले समय में गुट बना सकते हैं. अन्नाद्रमुक नेता थम्बिदुरई गाउंडर समुदाय से ही आते हैं. जो लोग अभी चुप हैं, वे धीरे-धीरे मुखर होते जाएंगे. ये देखने वाली बात होगी कि अन्नाद्रमुक की अंदरूनी राजनीति आने वाले समय में किधर करवट लेती है.

पढ़ें- तमिलनाडु की राजनीति पर भाजपा की पैनी नज़र

पढ़ें- जयललिता: 'भ्रष्टाचार, जेल और राजनीतिक बदला'

फिलहाल नवमनोनीत महासचिव शशिकला अपनी स्थिति मज़बूत करने के लिए हर मुमकिन कोशिश करेंगी. थेवर समुदाय भले ही उन्हें अपना नेता मान ले लेकिन गाउंडर और दलित समुदाय क्या उन्हें स्वीकार कर पाएगा.

जयललिता जिस तरह से हर समुदाय को साथ लेकर चलती थीं क्या शशिकला उन्हीं के नक्शे कदम पर चल पाएंगी. यह भी देखने वाली बात होगी. इसमें कोई दो राय नहीं है कि आने वाले समय में शशिकला को दीपा जयकुमार की चुनौती मिलने वाली है.

(बीबीसी संवाददाता निखिल रंजन से बातचीत पर आधारित.)

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

मिलते-जुलते मुद्दे