प्रेस रिव्यू- 'राष्ट्रगान के अपमान का आरोप, मलायलम लेखक गिरफ़्तार'

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इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक मलयालम लेखक और रंगकर्मी कमल सी चवारा उर्फ़ कमलसी प्राणा को केरल पुलिस ने रविवार को कोझीकोड से गिरफ्तार किया है.

उन पर एक फ़ेसबुक पोस्ट में राष्ट्र गान का अपमान करने का आरोप है. उन पर भारतीय दंड संहिता की धारा 124ए के तहत देशद्रोह का आरोप लगाया गया है.

उनके खिलाफ़ भाजपा युवा मोर्चा के एक कार्यकर्ता ने कोल्लम ज़िले में दो दिन पहले एफ़आईआर दर्ज कराई थी.

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प्राणा ने अपने हालिया मलयालम उपन्यास से कुछ वाक्य फ़ेसबुक पर पोस्ट किए थे. ये वो अंश थे जिनमें एक स्कूल की चर्चा की गई थी जहां शिक्षक छात्रों को कक्षा के दौरान शौचालय जाने की अनुमति नहीं देते हैं.

दोपहर चार बजे कक्षा के ख़त्म होने पर छात्र राष्ट्रगान गाते हैं. उपन्यास कहता है कि छात्रों के लिए राष्ट्रगान का मतलब है कि अब वो शौचालय जा सकते हैं.

हिंदुस्तान टाइम्स ने लिखा है कि चुनाव आयोग ने राजनीतिक दलों को अज्ञात स्रोतों से मिलने वाले चंदे की सीमा 2000 रुपए करने की मांग की है.

फ़िलहाल ये सीमा 20 हज़ार रुपए है, लेकिन 20 हज़ार या उससे ज़्यादा के चंदे पर दानदाता का पूरा पता और विवरण पार्टी को संभाल कर रखना होता है.

इस संबंध में चुनाव आयोग ने जनप्रतिनिधि कानून में संशोधन की मांग की है.

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि पार्टियां 500 और हज़ार के पुराने नोट अब चंदे के तौर पर स्वीकार नहीं कर सकती हैं, लेकिन आठ नवंबर को नोटबंदी की घोषणा से पहले जमा चंदा बैंक में जमा करा सकती हैं.

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टाइम्स ऑफ़ इंडिया ने 2011 की जनगणना के आंकड़ों के हवाले से लिखा है कि भारत में अविवाहित महिलाओं से ज़्यादा बड़ी संख्या में विवाहित महिलाएं नौकरीपेशा हैं.

विवाहित कामकाजी महिलाएं कम बच्चे चाहती हैं और इसमें भी वो बेटे को प्राथमिकता देतीं हैं, जिससे लिंगभेद के आंकड़े प्रभावित होते हैं.

15-49 साल के बीच की उम्र की केवल 27 फ़ीसदी अविवाहित महिलाएं ही नौकरी कर रही हैं वहीं शादीशुदा महिलाओं में ये आंकड़ा 41 फ़ीसदी है.

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हिंदुस्तान टाइम्स ने लिखा है कि केंद्र सरकार जल्द ही ऑटो कंपनियों और उनके एजेंटों के लिए पुरानी गाड़ियों को ख़रीदकर उन्हें रिसाइकल करना अनिवार्य कर सकती है.

इस कदम का मकसद नवंबर में दिल्ली में स्मॉग से बढ़े वायु प्रदूषण और भारत में प्रदूषण के लिए ज़िम्मेदार लाखों पुरानी गाड़ियों, ट्रकों और बसों को हटाना है.

भारत में पुरानी बेकार गाड़ियों को रिसाइकल करने की कोई नीति नहीं होने की वजह से बहुत बड़ा असंगठित क्षेत्र कबाड़ के काम में लगा हुआ है, जहां गाड़ियों के हिस्से बेचे जाते हैं.

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पर्यावरण मंत्रालय की अधिसूचना के बाद ये कदम अगले साल से लागू हो सकता है. हालांकि ऑटो कंपनियों को एक से तीन साल का समय इस नई नीति को अपनाने के लिए दिए जा सकता है.

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