कैसे होगा कैशलेस जब मोबाइल पेमेंट से है खतरा

पेट्रोल पंपों पर पेट्रोल या डीज़ल भरवाने के बाद मोबाइल वॉलेट से इसका भुगतान करना ख़तरनाक़ हो सकता है. मोबाइल से डेटा ट्रांसफर करने के दौरान विस्फोट हो सकता है.

जी नहीं, ये सोशल मीडिया से वायरल हुई कोई पोस्ट या वीडियो नहीं है, बल्कि पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन यानी पीईएसओ द्वारा कुछ साल पहले जारी किए गए दिशानिर्देश हैं.

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इन दिशानिर्देशों के मुताबिक पेट्रोल पंपों पर तेल भरवाने की जगह से छह मीटर के भीतर मोबाइल फ़ोन का इस्तेमाल ख़तरनाक हो सकता है और इससे विस्फोट तक हो सकता है.

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ऐसे में लोगों को पेटीएम, फ्रीचार्ज, मोबीक्विक, ऑक्सीजन वॉलेज और कई बैंकों और टेलीकॉम कंपनियों के मोबाइल वॉलेट से पेट्रोल-डीज़ल भरवाने के लिए प्रेरित करने की सरकार की योजना को धक्का लग सकता है.

नरेंद्र मोदी सरकार कैशलेस अर्थव्यवस्था पर ज़ोर दे रही है और हाल ही में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कैशलेस लेन-देन को बढ़ावा देने के लिए जो घोषणा की है उसमें पेट्रोल पंपों पर कैशलेस लेन-देन पर 0.75 प्रतिशत की छूट भी शामिल है.

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ऑयल मार्केटिंग कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन (आईओसी) के पूर्व चेयरमैन बीएम बंसल ने बीबीसी से बातचीत में माना कि भारत में भी पेट्रोल पंपों पर तेल भरवाने के दौरान विस्फोट की कुछ घटनाएं हुई हैं और इसके बाद ही पीईएसओ को ये दिशानिर्देश जारी करने पड़े.

बंसल ने बताया, "पेट्रोल, डीज़ल भरवाते हुए इसकी वाष्प टंकी के आस-पास बिखर जाती है और इस दौरान मोबाइल से निकलने वाली तरंगों के इसके संपर्क में आने से आग लगने का जोखिम बना रहता है."

उन्होंने बताया कि इस तरह के दिशानिर्देश सिर्फ भारत में ही जारी नहीं किए गए हैं, बल्कि कई यूरोपीय देशों में भी इस तरह के प्रावधान हैं.

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यह पूछे जाने पर कि क्या प्रत्येक पेट्रोल पंप पर तेल भरवाने के दौरान मोबाइल का इस्तेमाल नहीं करने के संकेतक लगे हैं, बंसल ने कहा कि पाँच-छह साल पहले एक मुहिम चलाई तो गई थी, लेकिन अब क्या स्थिति है कहना मुश्किल है.

हालाँकि पेट्रोल पंपों पर अब भी नगद तेल भरवाने वालों को तादाद बहुत ज़्यादा है. हाल ही में आई एक रिपोर्ट के मुताबिक ऑल इंडिया पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन ने बताया था कि 85 प्रतिशत ग्राहक अब भी नगद तेल भरवाते हैं.

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