जस्टिस खेहर ने बताया था, धर्म क्या हो

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जस्टिस जगदीश सिंह खेहर को ज़्यादातर उनके फ़ैसलों के लिए ही जाना जाता रहा है. ख़ासतौर पर उन फैसलों के लिए जो उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में दिए हैं. जस्टिस खेहर ने साल 2011 के सितंबर माह में सुप्रीम कोर्ट के जज के रूप में शपथ ली थी.

'कौन सच्चा सिख है?' इस सवाल को लेकर पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट में दायर एक याचिका की सुनवाई के दौरान जस्टिस खेहर के नेतृत्व वाली खंडपीठ ने जो फ़ैसला दिया था उसकी चर्चा पूरे देश में हुई थी. जस्टिस खेहर उस समय पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के जज थे.

इस मामले की सुनवाई के दौरान जस्टिस खेहर ने कहा था, "धर्म की अवधारणा वैसी ही होनी चाहिए जिस बुनियाद पर धर्म है, न कि वैसी जैसा हम चाहते हैं कि धर्म हो."

साल 2011 के सितंबर में सुप्रीम कोर्ट में शुरू हुआ उनका कार्यकाल भी काफी चर्चा में रहा. सुप्रीम कोर्ट के जज के तौर पर दिए गए उनके फ़ैसले हमेशा सुर्खियों में रहे. मिसाल के तौर पर 2-जी स्पेक्ट्रम का मामला जिसमें सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष 'प्रेसिडेंशियल रेफ़रेंस' की एक याचिका दायर की थी.

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जस्टिस खेहर की खंडपीठ ने याचिका की सुनवाई के दौरान सरकार को सचेत किया कि प्राकृतिक संसाधनों को ख़ैरात में नहीं दिया जा सकता. दूसरा चर्चित मामला जजों की नियुक्ति से जुड़ा है.

जस्टिस खेहर के नेतृत्व में बनी सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यों वाली संविधान पीठ ने सरकार द्वारा प्रस्तावित 'नेशनल जुडिशियल अपॉइंटमेंट्स कमीशन' यानी 'एनजेएसी' को ख़ारिज कर दिया था.

चंडीगढ़ के 'गवर्नमेंट कॉलेज' से विज्ञान में स्नातक जस्टिस खेहर ने उसी कॉलेज से पहले एलएलबी की डिग्री ली, फिर एलएलएम किया. उसके बाद 1979 में वो पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट, हिमाचल कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में बतौर वकील काम करने लगे.

1992 में उन्हें केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ का महाधिवक्ता नियुक्त किया गया. फिर 1999 में उन्हें पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट का जज नियुक्त किया गया.

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Image caption जस्टिस टी एस ठाकुर का कार्यकाल 3 जनवरी को खत्म हो गया.

वर्ष 2008 से लेकर 2009 तक उन्होंने दो बार पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश के रूप में भी शपथ ली थी जिसके बाद उन्हें उत्तराखंड हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया.

इसके बाद जस्टिस खेहर कर्नाटक हाई कोर्ट में भी मुख्य न्यायाधीश रहे.

इसी बीच मई 2010 ऐसा मामला आया जिसने जस्टिस खेहर को एक बार फिर सुर्ख़ियों में ला दिया. यह मामला था कर्नाटक हाई कोर्ट के जस्टिस पी डी दिनाकरन का राज्यसभा में महाभियोग.

भारतीय संसद के ऊपरी सदन यानी राज्यसभा के अध्यक्ष ने जस्टिस खेहर को भी 'जजेज़ रिमूवल कमिटी' में बतौर सदस्य शामिल किया जो जस्टिस दिनाकरन पर आरोपों की जाँच कर रही थी.

64 वर्षीय खेहर ने चार जनवरी को भारत के मुख्य न्यायाधीश के पद की शपथ ले ली है. सिख समुदाय से आने वाले वो पहले मुख्य न्यायाधीश होंगे.

उनका कार्यकाल मात्र सात महीने का होगा और वे 28 अगस्त 2017 को रिटायर हो जाएँगे.

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