पाक शरणार्थियों को डोमिसाइल-सर्टिफिकेट के ख़िलाफ़ प्रदर्शन की अपील

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Image caption शरणार्थियों की संख्या अभी 80 हज़ार के आसपास है.

जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तानी शरणार्थियों को नागरिकता दिए जाने के मुद्दे ने एक बार फिर अपनी जगह बनाई है.

भारत प्रशासित कश्मीर के अलगाववादियों ने पाकिस्तानी शरणार्थियों को डोमिसाइल-सर्टिफिकेट (मूल निवास प्रमाणपत्र) जारी करने के ख़िलाफ़ प्रदर्शन करने की अपील की है.

इसे लेकर कई तरह की राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं.

राजनीतिक नज़रिया

जम्मू-कश्मीर विधानसभा के एक निर्दलीय सदस्य इंजीनियर राशिद ने कहा, "भारत सरकार इन शरणार्थियों को बिहार में बसाए."

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Image caption निर्दलीय विधायक इंजीनियर रशीद

दूसरी ओर विपक्षी नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रवक्ता जुनैद मोटो का कहना है, ''जो डोमिसाइल-सर्टिफिकेट बीजेपी सरकार शरणार्थियों को दे रही है, ये उस दिशा में पहला क़दम है कि उन्हें मतदान का अधिकार मिले और उन्हें यहां का नागरिक माना जाए. अगर बीजेपी का ये मक़सद है तो हम उसका विरोध करेंगे.''

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वहीं अलगावादी नेता और हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के चेयरमैन मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ कहते हैं कि शरणार्थियों का मसला इंसानी मसला है जिस पर सियासत नहीं बल्कि समाधान होना चाहिए.

राज्य के बीजेपी नेता और पार्टी जनरल सेक्रेटरी अशोक कौल चाहते हैं कि इन शरणार्थियों को नागरिकता मिले.

लेकिन राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि इस मसले को जान-बूझकर सियासी रंग दिया जा रहा है.

सरकार का दावा

सरकार का कहना है कि शरणार्थियों को जो सर्टिफिकेट दिए जा रहे हैं वो डोमिसाइल नहीं बल्कि 'आइडेंटिफिकेशन-सर्टिफिकेट' हैं.

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Image caption भाजपा के उपमुख्यमंत्री निर्मल सिंह के साथ पीडीपी नेता और मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती.

सरकार के प्रवक्ता नईम अख़्तर ने प्रेस को जारी एक बयान में डोमिसाइल सर्टिफिकेट की ख़बरों को ग़लत बताया है.

उन्होंने कहा, ''ऐसा लग रहा है कि जान-बूझकर एक मुहिम चलाई जा रही है जिसका मकसद यहां की हालात बिगाड़ना है.''

शरणार्थियों की तकलीफ़

पश्चिम पाकिस्तानी शरणार्थी एक्शन कमिटी के मुखिया लोपा राम गांधी ने बीबीसी को बताया, ''हमने भारत सरकार से नागरिकता मांगी है, न कि डोमिसाइल सर्टिफिकेट. हमारी तीन पीढ़ियां बर्बाद हो चुकी हैं.''

उन्होंने बताया, "साल 1947 में बंटवारे के समय इन शरणार्थियों ने जम्मू आकर पनाह ली थी जिनकी संख्या अभी 80 हज़ार के आसपास है."

बहरहाल, कश्मीर घाटी में अलगाववादी नेताओं के अलावा विपक्षी नेशनल कॉन्फ्रेंस और अन्य राजनीतिक दलों ने महबूबा मुफ्ती सरकार के कथित फैसले के ख़िलाफ़ विरोध करना शुरू कर दिया है.

जबकि वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक ताहिर मोहिउद्दीन कहते हैं, ''बीजेपी तो इस मसले पर खुलकर बात कर रही है, लेकिन पीडीपी चुप है और आने वाले दिनों में पीडीपी इस मसले को लेकर अकेले मझधार में फंस सकती है."

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