एडिटर्स पिक: ये 10 बातें आपसे मिस तो नहीं हो गईं?

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नोटबंदी का एक और हफ़्ता गुज़र गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस नेता राहुल गाँधी के तीखे बयानों ने सुर्ख़ियाँ बनाईं.

इन सबके बीच चर्चा गर्म हो चली है उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव की. अटकलबाज़ियाँ ज़ोरों पर हैं इसलिए इस हफ़्ते हमने चार ख़ास नज़रिए आपके सामने रखे.

जिस तरह समाजवादी पार्टी कुनबे में बीते कुछ समय से तक़रार की ख़बरें सामने आ रही थीं उसके बाद एक नज़र इस बात पर कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव चुनाव को लेकर किस तरह की रणनीति अपना रहे हैं-

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पढ़िए- क्या जयललिता होने के रास्ते पर हैं अखिलेश यादव?

साल 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी ने जिस तरह बाक़ी पार्टियों का पत्ता साफ़ किया उसके बाद तो ऐसा लगा था कि राज्य में विधानसभा चुनाव बीजेपी के लिए 'केक वॉक' होने चाहिए. मगर क्या सचमुच ऐसे हालात हैं-

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पढ़िए- जीती हुई लड़ाई में क्या पिछड़ने लगी है बीजेपी?

यूपी में लोकसभा चुनाव में भले ही बहुजन समाज पार्टी एक भी सीट नहीं जीत पाई हो मगर मायावती की राजनीतिक ताक़त को कम करके आँकने की भूल शायद ही कोई करेगा. ऐसे में विधानसभा चुनाव से पहले मायावती की बसपा की स्थिति क्या है-

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पढ़िए- 'मायावती उत्तर प्रदेश में रहेंगी या मिट जाएँगी'

कांग्रेस पिछले कई चुनाव से उत्तर प्रदेश की राजनीति में हाशिए की पार्टी बनकर रह गई है. पार्टी नेता राहुल गाँधी ने इस बार पार्टी में चुनाव से पहले काफ़ी जोश भरने की कोशिश की है. एक आकलन उनकी इन कोशिशों की ज़मीनी हक़ीक़त का-

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पढ़िए- यूपी में फिर थम गए राहुल के बढ़ते क़दम?

लोग उत्तर प्रदेश चुनाव में नोटबंदी के असर की अटकलें लगा रहे हैं. इस बीच बीबीसी संवाददाता नितिन श्रीवास्तव ने बीते हफ़्ते गुजरात से इससे जुड़ी कुछ ख़ास रिपोर्टें आपके सामने रखीं. उन्होंने सूरत में हीरा कारोबार में लगे कारीगरों के साथ FB LIVE में एक ख़ास बातचीत की.

देखिए- सूरत में हीरे के कारोबार में लगे कारीगरों पर क्या बीत रही है

इस हफ़्ते पाकिस्तान में भारतीय फ़िल्मों पर लगा बैन हट गया. भारतीय फ़िल्मों की दीवानगी पाकिस्तान में कम नहीं है और शायद यही वजह है कि इस रोक के चलते पाकिस्तान में सिनेमा हॉल मालिकों को काफ़ी नुक़सान उठाना पड़ा.

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पढ़िए- पाकिस्तान में बॉलीवुड के बिना पेट पर लात पड़ने जैसी नौबत

सोवियत संघ के विघटन के इस हफ़्ते 21 दिसंबर को 25 साल पूरे हो गए. मिख़ाइल गोर्बाचोफ़ वो शख़्स थे जिनके सामने सोवियत संघ टूटा. बीबीसी संवाददाता स्टीवन रोज़ेनबर्ग की गोर्बाचोफ़ से मुलाक़ात इस हफ़्ते आप लोगों ने काफ़ी पसंद की-

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Image caption मिख़ाइल गोर्बाचोफ़ अब बहुत कम मीडिया से बात करते हैं.

पढ़िए- मिख़ाइल गोर्बाचोफ़: जिनके देखते-देखते सोवियत संघ बिखर गया

क्या आपने कभी सोचा है कि सुबह उठकर हम हर बार अपने सपने याद नहीं रख पाते. इसी पर इस हफ़्ते थी बीबीसी की एक ख़ास रिपोर्ट जिसमें बताया गया इन चार सपनों के बारे में जिन्हें हम कभी नहीं भूल पाते.

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पढ़िए- वो चार सपने जो हम कभी नहीं भूलते

गर्भनिरोध के कई तरीक़े इस समय मौजूद है मगर इस बात की चर्चा वैज्ञानिक जगत या आम लोगों के बीच भी होती रहती है कि आख़िर गर्भनिरोधक गोलियों का कितना असर पड़ता है उन्हें इस्तेमाल करने वालों पर-

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पढ़िए- कितनी ख़तरनाक होती हैं गर्भनिरोधक गोलियाँ?

और चलते-चलते आपको दिखाना चाहते हैं ताज महल के नज़ारे कुछ उस ऐंगल से जहाँ से उसे ख़ुद शाहजहाँ तक ने नहीं देखा होगा. आप ज़रूर देखिए-

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देखिए- ताजमहल को शाहजहाँ ने भी ऐसे नहीं देखा होगा

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