जेल जहां मुस्कुराती हैं महिला क़ैदी

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जेल में रहने वाले लोगों को अपराधी, सज़ायाफ्ता या क़ानून तोड़ने वालों में गिना जाता है.

हाल ही में मैं लखनऊ गया, जहां मुझे नारी बंदी निकेतन जाने का मौका मिला. यह जेल महिला क़ैदियों के लिए है और इसमें उनके बच्चों के भी रहने की जगह है.

लेकिन मुझे ये जेल अच्छे मूल्यों की शिक्षा देने वाला संस्थान नज़र आया. ऊपर की तस्वीर 25 साल की नीलम रामचंद्र गुप्ता की है.

नीलम 11 साल नारी बंदी निकेतन में बिता चुकी हैं. वे कम्प्यूटर-स्किल में माहिर हैं और जेल के अंदर सांस्कृतिक कार्यक्रमों को संचालित करती हैं.

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यहां रहने वाली महिला क़ैदियों ने बंज़र ज़मीन को ऊपजाऊ बना दिया है जहं वो कई तरह की सब्जियां उगाती हैं.

साफ़ सुथरा जेल होने के साथ साथ यहां का खाना भी मुझे काफ़ी पसंद आया.

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इन क़ैदियों को अपनी रिहाई का इंतज़ार है और यही इंतज़ार उन्हें गेट से बाहर झांकने के लिए विवश कर देता है.

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इस जेल में जहां एक ओर महिलाएं अपनी सज़ा काट रही हैं, वहीं उनके बच्चों को पढ़ने लिखने की सुविधाएं मिली हुई है, स्कूल जैसा माहौल दिखता है.

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Image caption जेल की रसोई में रोटियां बनाती महिला क़ैदी
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Image caption जेल का माहौल कुछ ऐसा है कि क़ैदियों के चेहरे पर मुस्कुराहट नज़र आती है.
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Image caption इस जेल में महिला क़ैदियों को पढ़ाने-लिखाने की भी व्यवस्था है.
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Image caption जेल में सब्ज़ी-भाजी उगाने की ख़ुशी इस क़ैदी के चेहरे पर साफ़ नज़र आ रही है.
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यहां कई तरह की महिला क़ैदी अपनी सज़ा काट रही हैं. इसमें सबसे ज़्यादा उम्र सकीना बेगम महमूद की है. वे 83 साल की हैं.

सकीना ने यहां क्रोएशिया से काम करना सीखा है और दूसरी क़ैदियों को सिखाने का काम भी किया है.

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