'बिना तैयारी कर रही है कांग्रेस एकता की कोशिश'

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नोटबंदी के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरने के लिए कांग्रेस ने मंगलवार को विपक्षी दलों की बैठक बुलाई है. हालांकि बैठक के पहले ही विपक्षी एकता पर सवाल उठ रहे हैं.

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी दिल्ली आ रही हैं मगर सीपीएम ने साफ़ कर दिया है कि वो इस बैठक में हिस्सा नहीं लेगी.

वहीं राष्ट्रीय जनता दल ने कहा है कि वो मीटिंग में हिस्सा लेगी मगर जनता दल यूनाइटेड ने अपना रुख़ साफ़ नहीं किया है.

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कांग्रेस ने संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान भी विपक्ष को एकजुट करने की कोशिश की थी. सत्र खत्म होने के बाद भी कांग्रेस की कोशिश बरक़रार है.

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Image caption संसद के शीतकालीन सत्र में विपक्ष नोटबंदी के मुद्दे पर एक साथ आया था

कांग्रेस के इस प्रयास पर वरिष्ठ पत्रकार नीरजा चौधरी का आकलनः

"कांग्रेस की कोशिश तो यही है कि विपक्षी दल इकट्ठे होकर नोटबंदी के मुद्दे पर अपने विरोध को सड़कों पर ले जाएँ.

ये एकता संसद में दिखी भी थी और संसद के सत्र के अंतिम दिन सारी 15 विपक्षी पार्टियाँ एक मार्च कर राष्ट्रपति को ज्ञापन देने जानेवाले थे.

मगर उस दिन राहुल गांधी ने किसानों की समस्याओं को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुलाक़ात की. उस एक क़दम ने विपक्षी एकता को भंग कर दिया और कई पार्टियाँ उस मार्च में नहीं गईं.

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Image caption प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाक़ात करते राहुल गांधी और कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेता

अब राहुल गांधी ने फिर एक कोशिश की है, मगर वाम दल नहीं आना चाहते हैं, ऐसा लग रहा है कि जेडी(यू) भी नहीं आएगा, और सपा-बसपा ने अभी तक अपना रूख़ साफ़ नहीं किया है.

तो ऐसा लगता है कि ये बैठक बिना किसी तैयारी के बुलाई गई है.

और अगर सभी पार्टियाँ अलग-अलग दिशा में जाएँ तो उसका लाभ भाजपा और प्रधानमंत्री को होने वाला है.

अगर आप हर पार्टी से अलग बात करेंगे और सारी चीज़ें स्पष्ट करने के बाद बैठक बुलाएँगे तब तो नज़ारा कुछ होगा, मगर ऐसे ही कोई बैठक बुला लेना और आशा करना कि विपक्षी एकता के नाम पर सभी दल आ जाएँगे, तो मुझे नहीं लगता ऐसा होनेवाला है.

इसमें एक और चीज़ भी है कि इस मुहिम की अगुआई कौन करेगा, विपक्ष को एकजुट करने के लिए एक सूत्रधार की ज़रूरत है, मगर वो कौन होगा ये अभी स्पष्ट नहीं है.

कांग्रेस चूँकि एक राष्ट्रीय पार्टी है इसलिए ये स्वाभाविक है कि वो सूत्रधार बने, मगर अभी जो अनिश्चितता है, कि क्या राहुल गांधी पार्टी अध्यक्ष बनेंगे, और क्या विपक्षी दल उनको स्वीकार करेंगे, ऐसे में कांग्रेस को लेकर स्वीकार्यता तब बढ़ेगी जब लोगों में भाजपा को लेकर नाराज़गी बढ़ेगी.

वो जबतक नहीं होता, तबतक लगता तो नहीं कि उनके अपने प्रयासों से बात आगे बढ़ रही है."

(बीबीसी संवाददाता वात्सल्य राय से बातचीत पर आधारित)

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