वो मां जिसे बच्ची की लाश कुत्ते का पीछा करके मिली

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(इस ख़बर में दी गई जानकारी कुछ लोगों को विचलित कर सकती है)

"वो सुबह बहुत मनहूस थी. घर में खाना भी नहीं बना था. मेरी बेटी पांच दिनों से लापता थी. सो, हम लोग परेशान थे. मैं अपनी मां के साथ घर के अहाते में बैठी थी. तभी एक कुत्ता मुंह में कुछ बड़ी चीज दबाए उधर से गुज़रा. ग़ौर से देखा तो वह किसी बच्चे के कटे हाथ का टुकड़ा था."

पश्चिम बंगाल की सीमा से लगे झारखंड के बोड़ाम गांव की पूनम देवी ने बिना रुके बांग्ला में हमें ये बताया.

उन्होंने आगे कहा- "हम चिल्लाए तो कुत्ता टुकड़ा वहीं छोड़कर भाग गया. हम बुरी तरह डर गए थे. हम लोग उधर गए, जिधर से कुत्ता आया था. वहां बोरी में एक लाश थी. उसकी आंखें किसी ने निकालकर बोरी से बाहर फेंक दी थीं. दोनों हाथ भी कटे थे. हटिया (साप्ताहिक बाज़ार) का दिन था. सड़क पर लोगों की आवाजाही थी."

भावुक होकर पूनम ने बताया- "हमें बदहवास देख लोगों ने बोरी से लाश निकाली. हाय राम, वह मेरी बेटी थी. उसे किसी ने मार दिया था."

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बोड़ाम गांव में 20 घर हैं और क़रीब 100 लोगों की आबादी है. पूनम की बेटी की जघन्य ढंग से हत्या कर दी गई. केस भी दर्ज हुआ, पर एक हफ़्ते बाद भी किसी की गिरफ़्तारी नहीं हुई है.

जब मैं गांव पहुँचा, तो पूनम और उनके पति बेटी का श्राद्ध कर्म कर रहे थे. सूखे चूड़ा में दही और गुड़ मिलाकर बना प्रसाद चढ़ाया गया था.

वह पूछती हैं, "मेरी चार साल की बेटी से किसकी दुश्मनी थी? दुश्मनी तो हमसे भी किसी की नहीं है. फिर ऐसा क्यों?"

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गांव वालों को शक था कि बच्ची से दुष्कर्म के बाद या शायद तंत्र विद्या के बाद उसकी हत्या की गई लेकिन पुलिस इससे इनकार करती है.

बोड़ाम गांव स्टील सिटी जमशेदपुर से महज़ 26 किलोमीटर दूर है.

पटमदा से चांडिल जाने वाली पक्की सड़क के किनारे फूस और मिट्टी के मकानों वाला गांव, जहां के ज़्यादातर लोग खेतिहर मज़दूर हैं और इनमें कुछ अवैध ढंग से चलने वाले क्रशरों में पत्थर तोड़ते हैं.

पूनम देवी की बेटी 15 दिसंबर को ग़ायब हुई थी. उन्हें हिंदी नहीं आती, इसलिए उन्होंने पड़ोस के रवि सिंह को रिपोर्ट दर्ज कराने थाने भेजा.

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पूनम देवी का दावा है कि पुलिस ने उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की और अगर खोजबीन होती, तो शायद उनकी बेटी ज़िंदा मिल जाती. बोड़ाम पुलिस के मुताबिक़ यह मिसिंग रिपोर्ट थी इसलिए उसकी रिपोर्ट सिर्फ़ स्टेशन डायरी में दर्ज की गई थी.

स्थानीय पत्रकार कल्याण के मुताबिक़ 21 दिसंबर को लाश मिलने के बाद नाराज़ गांव वालों ने उस असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर को पेड़ से बांधकर पीटा, जिसने रिपोर्ट दर्ज नहीं की थी.

पुलिसकर्मी को बाद में सस्पेंड कर दिया गया. पुलिस ने 200 अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ सरकारी काम में बाधा पहुँचाने की रिपोर्ट भी दर्ज की.

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पूर्वी सिंहभूम ज़िले के एसपी (ग्रामीण) शैलेंद्र बर्णवाल का कहना है, ''पोस्टमॉर्टम करने वाले डॉक्टरों को बलात्कार के सबूत नहीं मिले हैं. इस रिपोर्ट में बच्ची के गुप्तांगों पर लकड़ी या किसी चीज़ से मारने के निशान होने का ज़िक्र है. इस मामले में एक तांत्रिक समेत चार लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई है. जल्दी ही हम किसी नतीजे पर पहुँच जाएंगे.''

बोड़ाम की इस वारदात और रांची में एक इंजीनियरिंग छात्रा से बलात्कार के बाद हत्या के मामलों को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सरकार पर अपराधिक गतिविधियों पर काबू पाने में नाकाम होने का आरोप लगाया है और मुख्यमंत्री का इस्तीफ़ा मांगा है.

(पीड़ित परिवार की पहचान छिपाने के लिए नाम बदल दिए गए हैं)

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