शशिकला का गेम-प्लान क्या है?

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Image caption शशिकला पुष्पा

एआईएडीएमके की महासचिव बनने से एक दिन पहले शशिकला के समर्थकों ने नामांकन पत्र भरने आए एक शख्स की पिटाई कर दी.

लिंगेस्वरण थिलायन चेन्नई स्थित पार्टी मुख्यालय में घुसने की कोशिश कर रहे थे तभी कथित तौर पर शशिकला के समर्थकों ने उन पर हमला बोल दिया.

लिंगेस्वरण अपनी पत्नी और राज्यसभा सांसद शशिकला पुष्पा का नाम महासचिव के लिए प्रस्तावित करने पहुंचे थे.

गुरुवार को पार्टी की जनरल काउंसिल पार्टी में जयललिता का उत्तराधिकारी चुनने के लिए मिल रही है. जानकार मानते हैं कि इस बैठक में वीके शशिकला को पार्टी की कमान सौंपी जाएगी.

यह लगभग तय है कि एआईएडीएमके की उच्चस्तरीय बॉडी जनरल काउंसिल वीके शशिकला को औपचारिक रूप से आमंत्रित करेगी और उन्हें पार्टी महासचिव बना दिया जाएगा.

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दूसरी तरफ विश्लेषक इस बात से भी इनकार नहीं कर रहे हैं कि शशिकला के समर्थक उन्हें मुख्यमंत्री बनाने की भी कोशिश कर रहे हैं. इस तरह की कोशिश जयललिता की मौत के बाद भी की गई थी.

शशिकला जयललिता की तीन दशक तक सबसे भरोसेमंद सहयोगी रही हैं. गुरुवार को जब प्रस्तावित बैठक होगी तो उसमें शशिकला के शरीक होने की उम्मीद नहीं है. ऐसे संकेत मिल रहे हैं कि पार्टी के सीनियर नेता सी पोन्नैयन औपचारिक रूप से शशिकला के नाम का प्रस्ताव रखेंगे. इससे पहले शशिकला को यह पद देने के लिए प्रस्ताव पास किया जा चुका है.

पोन्नैयन ने कहा, ''पार्टी महासचिव के लिए किसी ने शशिकला के दावे को चुनौती नहीं दी है. पार्टी के विभिन्न तबकों से शशिकला को समर्थन मिल रहा है.''

कुछ पार्टी काडरों की ओर से एक वकील की पिटाई के बाद पोन्नैयन का यह बयान आया है. इस वकील पर शशिकला समर्थकों ने इसलिए हमला बोल दिया क्योंकि वह उन्हें चुनौती देने पहुंच गए थे.

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Image caption वीके शशिकला

हालांकि शशिकला का विरोध केवल पुष्पा ही नहीं कर रही हैं बल्कि पार्टी काडर के भीतर भी उनका विरोध हो रहा है.

चेन्नई में ऑब्जर्वर रिसर्चर फाउंडेशन के डायरेक्टर एन सत्यमूर्ति पूरे घटनाक्रम को नज़दीक से देख रहे हैं.

उनका कहना है कि सामान्य रूप से पार्टी काडर नेतृत्व से सहमत होता है और जो सहमत नहीं होते हैं उन्हें हटना पड़ता है.

आख़िर क्या वीके शशिकला मानसिक रूप से महासचिव का पद लेने को अनिच्छुक हैं? क्या वह सीएम बनना चाहती हैं, जैसे एमजी रामचंद्रण के बाद जयललिता बनी थीं?

सत्यमूर्ति ने कहा, ''बिल्कुल सही बात है. लेकिन वह मुख्यमंत्री के पद तक धीरे-धीरे बढ़ना चाहती हैं, क्योंकि पनीरसेल्वम अभी मुख्यमंत्री हैं. पनीरसेल्वम को ख़ुद जयललिता ने ही सीएम बनाया था. इससे पहले भी पनीरसेल्वम दो बार सीएम रह चुके हैं. उन्हें मुख्यमंत्री का पद महासचिव की तरह आसानी से नहीं मिल सकता है. ऐसे में वह मुख्यमंत्री के पद की तरफ धीरे-धीरे बढ़ना चाहेंगी."

पुष्पा राज्यसभा सांसद हैं. उन्होंने संसद में जयललिता पर आरोप लगाया था कि वह महिलाओं की सुरक्षा नहीं कर पा रही हैं. उन्होंने जयललिता पर हिंसा और प्रताड़ित करने का भी आरोप लगाया था. इसके बाद पुष्पा को पार्टी से निकाल दिया गया था. हालांकि उन्होंने राज्यसभा से इस्तीफ़ा नहीं दिया था.

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Image caption दिवंगत जयललिता के साथ वीके शशिकला

एआईएडीएमके प्रवक्ता सीआर सरस्वती ने बीबीसी हिन्दी से बात करते हुए आरोप लगाया, ''शशिकला पुष्पा ओछी राजनीति कर रही हैं. जो महिला पार्टी की प्राथमिक सदस्य तक नहीं है, वह महासचिव का नामांकन कैसे दाखिल कर सकती है. उन्होंने जिस दिन अम्मा के ख़िलाफ़ बोला, उसी दिन से वो पार्टी से बाहर हैं."

पुष्पा कैंपेन चला रही हैं शशिकला के ख़िलाफ़.

यहां तक कि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में जयललिता की मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसकी जांच के लिए एक याचिका भी दाखिल की है.

कहा जा रहा है कि जयललिता के साथ तीन दशक तक उनकी सहयोगी रहीं वीके शशिकला को वह इस याचिका के ज़रिए घेरना चाहती हैं.

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