बीजेपी के लिए नाक का सवाल बनी प्रचार सामग्री

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में उनसे जुड़ी प्रचार सामग्री क्या अब नीलाम की जाएगी?

दरअसल कैंट रेलवे स्टेशन के पार्सल घर में "फ़्लेक्स" की शक्ल में 32 क्विंटल के 50 बंडल लावारिस पड़े हैं.

इनमें केंद्र सरकार की योजनाओं के स्लोगन और प्रधानमंत्री की तस्वीर प्रचार सामग्री पर छपी है.

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रेलवे इसे नीलाम कराकर इससे निजात पाना चाहता है.

उधर, वहां बीजेपी रेलवे से ये बातचीत करने में लगी है और रेलवे के लगाए क़रीब साढ़े तीन लाख की फ़ीस में राहत मांग रही है.

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उत्तर रेलवे के मुख्य पार्सल पर्यवेक्षक प्रकाश नारायण ने बीबीसी हिंदी को बताया, "25 मई 2016 से 10 जून 2016 के बीच में सूरत से किसी जिगनेश भल्ला के नाम से पार्सल आता रहा. इनमें कुछ में प्रधानमंत्री की तस्वीरों वाले सरकारी योजनाओं के स्लोगन दिखाई पड़े. इसके बाद भाजपा के स्थानीय नेताओं से संपर्क साधा गया."

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Image caption प्रकाश नारायण

"जुलाई में एक व्यक्ति आया, लेकिन जब उसे 44 हज़ार रुपए का स्थानीय शुल्क भरने को कहा तो वह उल्टे पांव चला गया. सूरत में जहां से ये पार्सल चला था, वहां भी संपर्क किया गया, पर कोई जवाब नहीं आया."

"अब 28 दिसंबर के दोपहर 3 बजे तक इन पार्सलों पर यही शुल्क तीन लाख 43 हज़ार 438 रुपए हो चुका है, जो बढ़ता जा रहा है. अगर जल्द कोई इन्हें लेने नहीं आया तो जनवरी में आधिकारिक फ़ैसले के बाद इनको नीलाम कर दिया जाएगा."

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बीजेपी के काशी प्रांत के मीडिया प्रभारी संजय भारद्वाज ने बीबीसी हिंदी से बातचीत में माना, ''जगह की कमी के चलते प्रचार सामग्री नहीं उठाई जा सकी है, लेकिन दो-तीन दिनों में इसे उठा लिया जाएगा.''

उनका तर्क है कि चूंकि स्वच्छ भारत अभियान को लेकर देश में कई संस्थाएं काम कर रहीं हैं, तो उन्हीं में से किसी ने यह प्रचार सामग्री मंगाई होगी.

संजय भारद्वाज के मुताबिक़ पार्टी इस मामले में गंभीर है, जहां तक रेलवे के स्थानीय शुल्क की बात है तो भाजपा रेलवे से इसमें छूट के लिए निवेदन कर रही है.

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