जब मुलायम बोले, 'चिंता मत करिए, अब पूरी बात सुनिए'

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समाजवादी पार्टी से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के निष्कासन का ऐलान पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने बेहद नाटकीय अंदाज़ में किया.

करीब तीस मिनट चली प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत मुलायम सिंह ने अपनी नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए की. फिर रामगोपाल यादव से अपनी तमाम 'व्यक्तिगत' शिकायतें बताईं और उनकी कथित अनुशासनहीनता का जिक्र किया.

लेकिन लखनऊ में हुई इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद किसी भी शख़्स को यह अंदाज़ा नहीं था कि मुलायम की शिकायत इतनी बड़ी हो जाएगी कि रामगोपाल के बाद वे अपने बेटे, अखिलेश को भी पार्टी से निकालने का ऐलान कर देंगे.

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प्रेस कॉन्फ्रेंस में वो 17वां मिनट रहा होगा. मुलायम सिंह यादव गिना रहे थे कि उन्होंने सपा को स्थापित करने के लिए क्या नहीं किया. वो इस बात पर भी ज़ोर दे रहे थे कि पार्टी में किसी की इतनी वख़्त नहीं है कि पार्टी के लिए उनके बराबर फ़ंड ला सके.

फिर मुलायम के ज़िक्र में अखिलेश आए. उन्होंने अखिलेश की फिक्र करते हुए कहा कि रामगोपाल ने अखिलेश का भविष्य ख़राब कर दिया है, जिसे अखिलेश समझ नहीं पा रहा है. और न ही उनसे इस बारे में राय ली जा रही है.

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Image caption मुलायम सिंह के ऐलान करते ही सड़कों पर उतर आए अखिलेश समर्थक.

एक पार्टी के अध्यक्ष और सूबे के मुख्यमंत्री की ताकत में किस तरह का अंतर होता है, इसका जायज़ा भी मुलायम सिंह के उस बयान से लगा, जिसमें उन्होंने कहा कि अखिलेश अपनी ताकत का लगातार इस्तेमाल कर रहा है और इसके जवाब में अब उन्हें अपनी ताकत दिखानी होगी और पार्टी अध्यक्ष की हैसियत में कुछ बड़ा फ़ैसला लेना होगा. मुलायम सिंह ने कहा कि इसके अलावा उनके पास कोई विकल्प नहीं बचा है.

यह कहकर मुलायम चुप हो गए. चश्मे की कमानियां सीधी कीं. कागज़ों में कुछ टटोला और फिर बगल में बैठे छोटे भाई शिवपाल यादव की ओर देखा. शिवपाल को मानो पता था कि नेताजी का इशारा किस तरफ है.

शिवपाल बोले, "दूसरा वाला अभी है नहीं. ये ही है. दूसरा वाला तो टाइप हो रहा है." यहां मशविरा देते हुए शिवपाल ने मुलायम से यह भी कहा कि वो वैसे ही (बिना लिखित कागज़ के) ऐलान कर दें.

इसके बाद मुलायम सिंह ने हाथ उठाते हुए प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद लोगों से कहा, "आप लोगों को लिख के भी मिल जाएगा. चिंता मत कीजिए. अब पूरी बात सुनिये... हमें पता चला है कि रामगोपाल को मुख्यमंत्री का भी समर्थन प्राप्त है. इसलिए दोनों को पार्टी से 6 साल के लिए निकाला जाता है."

इसके बाद मुलायम सिंह यादव यह कहना भी नहीं भूले कि उनके लिए पद, सम्मान, बेटा और रिश्ता नहीं, पार्टी प्राथमिकता है.

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