'मितरों...हैप्पी दो हज़ार सतरा'

हर घर में एकाध रिश्तेदार होता है, जिससे घरवाले खौफ़जदा रहते हैं. वो रतलाम वाले फूफा हो सकते हैं या कानपुरवाली बुआ हो सकती हैं, जिनके आने की ख़बर से घर भर के लोग परेशान से हो जाते हैं-पता नहीं क्या कर जाये.

क्या लेने का सवाल खड़ा कर दे, जाने क्या बवाल खड़ा कर दे. पीएम की स्पीच अब कुछ-कुछ रतलामवाले फूफाजी का दर्जा रखने लगी है, जिसके आने की खबर से परेशानी फैल जाती है.

31 दिसंबर की पीएम की स्पीच कुछ यूं भी हो सकती है-

लाइनवाला पर्यटन:

मित्रों मैंने देखा कि इस देश में पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं. नोटबंदी के चक्कर में इतनी लंबी लंबी लाइनें लगीं कि रिकार्ड टूट गए.

मंगलयान ने जो तस्वीरें भेजी हैं उससे कनफ्यूजन खड़ा हो गया. ऊपर से कई लाइनें दिखीं पृथ्वी पर, एक बहुत लंबी सी लाइन तो बाद में चीन की दीवार बरामद हुई, पर उससे भी लंबी लाइनें हमारे हर शहर में दिखीं-दिल्ली, मुंबई, चेन्नई.

मित्रों हम आश्वस्त हो सकते हैं कि हमने चीन को पीछे छोड़ दिया है, मंगलयान चीन की सिर्फ़ एक लंबी लाइन को रिकार्ड कर पाया, पर भारत में हज़ारों लंबी लाइनें दिखीं.

'बैंक अनपढ़ लोगों को एटीएम कार्ड नहीं देता'

नोटबंदी पर कहां से चले, कहां आ गए हम

मित्रो मुझे फोन किए कई देशों के पीएम ने, वो बोले, मोदीजी हमारे देश की जितनी कुल जनसंख्या है, उतने तो आपके यहां बैंकों की लाइनों में दिखे लोग.

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मैंने कहा जी बिलकुल अपने यहां के बंदों को भेजिये यहां लाइन देखने के लिए. जरा सोचिए, विदेशों से टूरिस्ट आएं और आते ही भारतीयों से कहें कि हमारे मुल्क के साइज की लाइन दिखाओ. हम उसे किसी बैंक के बाहर ले जायें, वह हैरत में पड़े, उत्साह से फिर अगली लाइन को देखे.

लाइन पर्यटन को बढ़ाने के आइडिए बताइए मुझे मन की बात की ईमेल पर, वैसी लाइनें या उनसे भी लंबी लाइनें लगवाने के लिए 100 का नोट बंद किया जाये या कुछ और कदम उठाया जाए.

ला(इन) एंड आर्डर:

मित्रो मुझे यह बताते हुए अच्छा लगता है कि नोटबंदी के दौरान ला एंड आर्डर के मसले बहुत सुधर गए.

चोर-रहजनों-जेबकटों ने जेब काटना बंद कर दिया था. काटकर क्या मिलता था, पाँच सौ हजार के नोट.

ऐसे ऐसे वाकये सामने आये कि चोरों को तिजोरी काटकर 500 हजार के नोट मिले, तो उन्होने वो नोट वहीं छोड़ दिए और घर में रखा दही खाकर और दूध पीकर चले गए. साथ एक किलो टमाटर भी ले गए.

500-1000 के नोटों ने चोरों को शराफ़त का रास्ता नहीं दिखाया, उन्हें शरीफ़ होने पर मज़बूर किया नोटबंदी के बाद की लाइनों ने. लाइन ने ला एंड आर्डर की स्थिति सुधार दी. ऐसी परिस्थितियां नोटबंदी ने पैदा कीं कि चोरी-डकैती से लोगों का भरोसा उठ गया.

इंटेलीजेंस रिपोर्ट बता रही हैं कि कई चोरों ने संकल्प लिया कि भविष्य में छोटी चोरी, रहजनी ना करेंगे, ये काम बड़े स्केल पर करेंगे और विजय माल्या टाइप कारोबारी बनेंगे.

बैंकर वाली सर्जिकल स्ट्राइक:

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मित्रो हमने अभी नोटबंदी के दौरान हमें ऐसे-ऐसे बैंकर मिले नोटबंदी में जो कुछ का कुछ कर सकते हैं. कोई रकम कहीं भी ट्रांसफर कर सकते हैं.

इन तमाम बैंकरों हम पाकिस्तान में सीमा में छोड़ आयेंगे फिर ये अपने हुनर से पाकिस्तानी अर्थव्यवस्था में ऐसा खेल कर देंगे कि पाकिस्तानवाले देखते रह जायेंगे. ये बैंक ऑफ़ पाकिस्तान की रकम पूरी की पूरी स्विस बैंकों में ट्रांसफर कर सकते हैं.

नीतीशजी की दूध योजना:

मित्रो मैं, बिहार के सीएम नीतीशजी को धन्यवाद देना चाहूंगा, जो बिहार में शराबबंदी करके दूध को बढ़ावा दे रहे हैं. वह कहना चाह रहे थे कि दूध पीयो, स्टेमिना बनाओ और लग जाओ फिर एटीएम की लाइन में.

सोनम गुप्ता पर बहस:

मित्रों हमने देखा नोटबंदी के दौरान कई मसले आए सामने, जिनमें पारदर्शिता का मुद्दा भी सामने आया.

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मैंने अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा को कहा-देखो हम भारतीय कुछ ना छिपाते, हर बात साफ़ साफ़ करते हैं. सोनम गुप्ता बेवफा हैं-ऐसा मुद्दा भारतीयों ने नोटों पर लिखकर डिस्कस किया.

पहले जब बिल क्लिंटन बेवफा हुए थे व्हाईट हाऊस में, तब उनकी रिपोर्ट दबा दी गयी. छिपा दी गयी.

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हैप्पी हो हज़ार सतरा:

बताइये व्हाट्सअप पर कैसे कैसे मैसेज आ रहे हैं, हैप्पी हो दो हज़ार सतरा, ना हो नोटबंदी का ख़तरा. मित्रो नोटबंदी खतरा नहीं थी, खतरा नहीं है ये तो आप समझ ही चुके होंगे.

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