सांसें ‘लापता’ हैं, ‘खोज’ जारी है !

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झारखंड के गोड्डा में खदान धंसी, मज़दूर दबे.

भोड़ाय माइंस के बाहर लाइन से चंद लाशें रखी हैं. इनमें से कुछ को कंबल से ढंक दिया गया है. मानो उन्हें यहां पड़ रही भयंकर सर्दी से बचाने का जतन किया जा रहा हो. इलाके में घना कोहरा है. सुबह के साढ़े आठ बजे तक सूरज के दर्शन नहीं हुए.

शुक्रवार शाम यहां फिर से हुए भूस्खलन हुआ. इस कारण राहत के काम को रोक देना पड़ा. मौके पर मौजूद एनडीआरएफ़ की टीम को भूस्खलन के पूरी तरह रुकने का इंतजार है. ताकि राहत के काम में तेजी लाई जा सके.

झारखंड में खदान धंसी, कई मज़दूर फंसे

इस बीच कुल 11 लाशें निकाली गई हैं. महागामा के एसडीओ संजय पांडेय ने मीडिया को एक सूची दी है जिसके मुताबिक खान में हुए हादसे के बाद 26 लोग अभी भी लापता हैं.

स्थानीय लोग इस सूची को सही नहीं मानते. ग्रामीणों के मुताबिक, हादसे के वक्त खान में 40 से अधिक लोग थे. ऐसे में मलबे के अंदर कम से कम 30 और लोग होंगे.

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राहत के काम में लगी टीमें इन्हीं 30 लोगों की सांसें तलाश रही हैं. इन्हें लग रहा है कि शायद मलबे के अंदर से कोई धड़कन सुनाई दे और उसे सहेजा जा सके.

दुर्भाग्य यह कि हादसे के 36 घंटे से भी अधिक हो जाने के बावजूद मलबे के अंदर से किसी भी जिंदा आदमी को नहीं निकाला जा सका है.

ईस्टर्न कोलफ़ील्ड लिमिटेड (ईसीएल) की राजमहल परियोजना के तहद गोड्डा जिले का लालमटिया खनन क्षेत्र सुरक्षा मानकों को लेकर कई बार चुनौती बन चुका है.

झारखंड की राजधानी रांची से करीब 370 किलोमीटर दूर स्थित इस ओपेन माइंस के खनन का ठेका ईसीएल ने बिड़ला ग्रुप की सहयोगी कंपनी महालक्ष्मी कंस्ट्रक्शन को दे रखा था.

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Image caption गुरुवार रात को खदान में हादसा हो गया था.

गुरुवार की रात आठ बजे हुए हादसे के बाद इस कंपनी के तरफ से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है.

वह रजिस्टर भी सार्वजनिक नहीं किया गया है, जिसमें मजदूरों की हाज़िरी लगाई जाती थी. अगर वह सार्वजनिक किया गया होता, तो मलबे में मौजूद लोगों की वास्तविक संख्या का पता चलता.

इस बीच ईसीएल के सीएमडी राजीव रंजन मिश्र ने इस हादसे की जिम्मेवारी ली है. घटनास्थल पर उन्होंने कहा कि ईसीएल के मुखिया होने के नाते वे इस दुर्घटना की नैतिक जिम्मेवारी लेते हैं.

सीएमडी ने कहा, ''हमारी पहली प्राथमिकता मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने की है. राहत का काम चल रहा है और तब तक चलेगा जबतक कि मलबे में फंसे एक-एक आदमी को नहीं निकाला जा सके. इस बीच कोल इंडिया ने हादसे की जांच के लिए खान महानिदेशक की देखरेख में एक उच्चस्तरीय कमेटी गठित की है. यह कमेटी एक महीने के अंदर अपनी रिपोर्ट देगी.''

इधर पुलिस ने इस हादसे के लिए जिम्मेवार ईसीएल के स्थानीय प्रबंधक और महालक्ष्मी कंस्ट्रक्शन कंपनी के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है.

गोड्डा के एसपी हरिलाल चौहान ने बीबीसी से कहा, ''हम मामले की जांच कर रहे हैं. क्योंकि यह पता नहीं था कि खनन का काम कर रही महालक्ष्मी कंस्ट्रक्शन के कौन-कौन अधिकारी तब मौजूद थे, लिहाज़ा इस हादसे के लिए प्रबंधन को जिम्मेवार मानते हुए रिपोर्ट दर्ज की गई है.''

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मुख्य सचिव राजबाला वर्मा ने शुक्रवार को घटनास्थल का दौरा किया था. उन्होंने बीबीसी से कहा कि सरकार दोषियों को नहीं छोड़ेगी.

इधर विपक्षी पार्टियों ने इसके लिए राज्य सरकार को जिम्मेवार बताया है.

कांग्रेस की गोड्डा जिलाध्यक्ष दीपिका पांडेय सिंह ने बीबीसी से कहा, ''ये कोई हादसा नहीं सामूहिक हत्या है, जो अधिकारियों और माफ़ियाओं की सांठ-गांठ की वजह से हुआ है. अगर वक्त रहते काम रोक दिया जाता, तो ख़तरा टल सकता था.''

बहरहाल, घटनास्थल पर लोगों के रोने की आवाजें सुनाई दे रही हैं. ये वे लोग हैं जिनके परिजनों का पता नहीं चल सका है.

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