'समाजवादी सियासी ड्रामे' के वो 18 घंटे

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Image caption उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव

समाजवादी पार्टी में नाटकीय घटनाक्रम थमने का नाम नहीं ले रहा है.

शुक्रवार शाम पौने सात बजे समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह ने अपने बेटे और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के साथ पार्टी महासचिव रामगोपाल यादव को 6 साल के लिए निष्कासित करने की घोषणा कर दी थी.

आख़िर पिछले 20 घंटों में ऐसा क्या हुआ कि मुलायम सिंह को 180 डिग्री सियासी टर्न लेना पड़ा.

पूरे घटनाक्रम पर एक नज़र-

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  • शुक्रवार शाम 7:45 बजे: मुलायम सिंह और भाई शिवपाल यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अखिलेश यादव और रामगोपाल यादव को पार्टी से 6 साल के लिए निष्कासित करने की घोषणा की.
  • शुक्रवार, रात 8 बजे: सपा महासचिव रामगोपाल यादव ने इस फ़ैसले को असंवैधानिक बताते हुए कहा कि नेताजी जी बहकावे में आकर काम कर रहे हैं. उन्होंने यहां तक कह दिया कि अखिलेश यादव सभी सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा करेंगे.
  • शुक्रवार रात सवा आठ बजे: अखिलेश के आवास के सामने समर्थकों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई. इस पूरे घटनाक्रम के मद्देनजर अखिलेश ने शनिवार को 10 बजे विधायक दल की बैठक बुलाने की घोषणा की.
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Image caption मुलायम सिंह और अखिलेश यादव
  • शनिवार सुबह 10 बजे: अखिलेश ने विधायकों के साथ बैठक की. बताया जा रहा है कि इस बैठक में पार्टी के 190 से ज़्यादा विधायक शामिल हुए. अखिलेश ने इतने विधायकों को बैठक में बुलाकर अपनी ताकत को साबित कर दिया.
  • शनिवार दोपहर 11 बजे: मुलायम सिंह ने भी पार्टी नेताओं की बैठक बुलाई थी. कहा जा रहा है कि इस बैठक को पार्टी नेताओं ने खास तवज्जो नहीं दी.
  • शनिवार दोपहर 12 बजे: विधायक दल की बैठक के बाद अखिलेश यादव ने अपने पिता मुलायम सिंह यादव से मुलाक़ात की. इस बैठक में अखिलेश के साथ उनकी कैबिनेट के सबसे सीनियर मंत्री आजम ख़ान भी मौजूद थे. कहा जा रहा है कि आज़म ख़ान ने ही दोनों के बीच मध्यस्थता कराई.
  • शनिवार दोपहर 12: 30 बजे: मुलायम सिंह को पार्टी नेताओं ने बताया कि अखिलेश के साथ कुल 229 सपा विधायकों में से 200 से ज़्यादा का समर्थन हासिल है.
  • शनिवार दोपहर एक बजे: मुलायम सिंह ने अपने भाई शिवपाल यादव के साथ मीटिंग की. इसी मीटिंग के बाद दोनों नेताओं की फिर से वापसी की राह बनी.
  • शनिवार दोपहर दो बजे: अखिलेश और रामगोपाल यादव का पार्टी से निष्कासन रद्द कर दिया गया. शिवपाल ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी.
  • शनिवार सवा दो बजे: शिवपाल यादव ने कहा कि अब वह पुरानी बातें भूल गए हैं और पूरी पार्टी एक है क्योंकि सबसे बड़ी चुनौती सांप्रदायिक ताकतों से लड़ाई है.

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