'फुटेज में छेड़छाड़ करनेवालों की पहचान की कोशिश'

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बेंगलुरू पुलिस नए साल की पूर्व संध्या पर शहर के एक मुख्य इलाक़े में महिलाओं के साथ कथित छेड़छाड़ में लिप्त लोगों की पहचान के लिए वीडियो फ़ुटेज की जाँच कर रही है.

एक स्थानीय समाचारपत्र ने ऐसी तस्वीरें छापी हैं जिनमें रोती हुई औरतें महिला पुलिसकर्मियों को गले लगा रही हैं और अपने साथ छेड़छाड़ होने की शिकायत कर रही हैं.

बताया जा रहा है कि कथित छेड़छाड़ की ये घटना शहर के महात्मा गांधी रोड ब्रिगेड रोड के एक इलाक़े में हुई जहाँ नए साल का जश्न मनाने के लिए भारी भीड़ जमा थी.

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मगर अख़बार में रिपोर्ट प्रकाशित होने के 36 घंटे बाद या घटना के 72 घंटे बाद तक पुलिस के पास कोई औपचारिक शिकायत दर्ज़ नहीं हुई है.

बेंगलुरू के पुलिस कमिश्नर प्रवीण सूद ने बीबीसी को बताया, "हमने बहुत सारे वीडियो फ़ुटेज और तस्वीरों की जाँच की है. हम उनमें छेड़छाड़ के प्रमाण खोज रहे हैं. जैसे ही हमें ये मिला हम बिना कोई पल गँवाए कार्रवाई करेंगे."

एक जनवरी को शहर के पुलिस कमिश्नर का प्रभार स्वीकार करनेवाले प्रवीण सूद ने पत्रकारों और आम लोगों से ऐसी कोई भी तस्वीर या फ़ुटेज उनके साथ साझा करने का आग्रह किया है.

उन्होंने कहा, "हम पीड़ित लोगों के पास जाएँगे और उनकी शिकायतें दर्ज़ करेंगे."

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इस मुद्दे पर कर्नाटक के गृहमंत्री डॉ. जी परमेश्वरा के बयान को लेकर ख़ासा विवाद भी हुआ जिसमें उन्होंने कहा था कि "ऐसी घटनाएँ होती हैं".

महात्मा गांधी रोड ब्रिगेड रोड के इलाक़े में पिछले चालीस से भी अधिक वर्षों से नववर्ष की पूर्व संध्या पर भीड़ जुटती है.

क़ानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए वहाँ लगभग 1500 पुलिसकर्मी भी तैनात थे.

मगर बंगलौर मिरर अख़बार के फ़ोटोग्राफ़र अनंत सुब्रह्मण्यम जिनकी तस्वीरों से इस घटना की जानकारी सामने आई, वे कहते हैं कि "इस बार सामान्य से तीन गुना अधिक लोग जमा हो गए थे".

सुब्रह्मण्यम कहते हैं,"पौने बारह बजे रात से साढ़े बारह बजे रात तक यहाँ चलना-फिरना भी मुश्किल था. पुलिस कावेरी इंपोरियम जंक्शन पर भीड़ हटाती और वहाँ फिर भीड़ जुट जाती".

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"जैसे ही भीड़ थोड़ी छँटती लोग पुलिस के पास जाने लगे. मैंने देखा औरतें महिला पुलिसकर्मियों से अपने साथ छेड़छाड़ होने की शिकायत कर रही हैं. पुलिस ने उनसे पहचान करने के लिए कहा पर वो नहीं बता पाईं. वहाँ बिल्कुल अफ़रा-तफ़री थी."

"मैंने देखा एक लड़की बहुत सारे लोगों से घिरी हुई है और रो रही है."

इशिता (पूरा नाम नहीं) अपने परिवार के साथ उस रात घटनास्थल पर गई थीं. उन्होंने इस बात की पुष्टि की कि "कुछ औरतों को छुआ गया जब अचानक 20-30 लोग ग्रुप में सड़क पर दौड़ने लगे".

इशिता के परिवार को पुलिस ने सुरक्षा के बीच मेट्रो स्टेशन पहुँचाया और ये आश्वस्त किया कि पास में मौजूद कुछ मर्द उन्हें परेशान ना करें.

इशिता ने कहा, "हमें पिछले सालों की भीड़ का अनुभव था. मगर पुलिस के बारे में जो कहा जा रहा है, उससे उलट हमने पुलिसकर्मियों को देखा कि वो महिलाओं से पूछ रहे थे कि उन्हें कोई मदद तो नहीं चाहिए".

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