वो तीन महिलाएं जो मायावती की पसंद बनीं

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Image caption बीएसपी चीफ़ मायावती

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए बसपा ने 100 में से सिर्फ तीन महिलाओं पर भरोसा जताया है.

किसी महिला अध्यक्ष के नेतृत्व वाली पार्टी के 100 सीटों की पहली सूची में महज तीन महिला उम्मीदवार? जाहिर है उन नामों में लोगों की दिलचस्पी होगी.

बसपा ने बागपत के छपरौली सीट से राज बाला, मुजफ्फरनगर के बुढ़ाना से सैयदा बेगम और संभल के चंदौसी (सुरक्षित) से विरमावति को टिकट दिया है.

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राज बाला चौधरी

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Image caption राज बाला चौधरी

राज बाला चौधरी फिलहाल टीकरी नगर पंचायत की अध्यक्ष हैं. स्थानीय मीडिया में छपी रिपोर्टों के मुताबिक पार्टी ने छपरौली सीट पर पहले मुस्लिम दलित समीकरण का ख्याल रखा था, अब वह जाट दलित एकता का गणित साधना चाहती है. इसी वजह से पहले घोषित उम्मीदवार का टिकट काटा गया.

छपरौली सीट को अजीत सिंह की अगुवाई वाली राष्ट्रीय लोक दल का गढ़ माना जाता है. राज बाला चौधरी आपराधिक पृष्ठभूमि वाले सुनील राठी की मां हैं. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक सुनील दस साल से भी ज्यादा समय से जेल में हैं.

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सईदा राणा

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सईदा राणा मुज़फ्फरनगर के पूर्व सांसद क़ादिर राणा की बेगम हैं. मुजफ्फरनगर के इलाके में राणा परिवार के रसूख का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि बसपा और सपा दोनों ही इस परिवार पर भरोसा करती रही हैं. बुढ़ाना सीट पर सईदा राणा को बसपा टिकट से ये बात समझ में आती है.

कादिर राणा के विधायक भाई नूरसलीम राणा चरथवाल से बसपा प्रत्याशी हैं. उनके भतीजे शहनवाज़ राणा को सपा ने मीरापुर से टिकट दिया है. इसी परिवार के अब्दुल्ला राणा सपा के टिकट पर चरथावल में नूरसलीम राणा के सामने खड़े हैं.

स्थानीय मीडिया में इस बात की खूब चर्चा है कि एक ही गांव के चार प्रत्याशी तीन सीटों पर अपनी किस्मत आज़मा रहे हैं.

विरमावती

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चंदौसी (सुरक्षित) से बसपा उम्मीदवार विरमावती विधायक पत्नी रह चुकी हैं. उनके पति चंदौसी से ही विधायक रह चुके हैं और फिलहाल बसपा के ज़ोनल कॉर्डिनेटर हैं.

विरमावती जिस जाटव समाज से आती हैं, उसे बसपा के जनाधार का सबसे अहम हिस्सा माना जाता है.

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