कौन चलाएगा समाजवादी 'साइकिल'?

समाजवादी पार्टी की 'साइकिल' को अगर चुनाव आयोग ने ज़ब्त कर लिया, तो आगामी विधानसभा चुनाव में उत्तरप्रदेश की जनता को किस नए चुनाव चिह्न पर वोट डालने होंगे? इसे लेकर दोनों समाजवादी ख़ेमों में चर्चा है.

बुधवार को अखिलेश यादव खेमे के कथित कर्ताधर्ता रामगोपाल यादव ने कहा कि पार्टी की अंदरूनी जंग अब नहीं रुक सकती.

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इस ऐलान के बाद, राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि दोनों खेमों के साथ-साथ पार्टी के स्थापित चुनाव चिह्न को लेकर भी विवाद हो सकता है.

'साइकिल' को लेकर विवाद हुआ तो...

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पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस वाई क़ुरैशी के मुताबिक़ आयोग के सामने पहली बार यह स्थिति बनेगी, ऐसा बिल्कुल नहीं है. साल 1969 में भारत की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी कहे जाने वाली कांग्रेस के विभाजन के समय भी ऐसे ही हालात बने थे और नए चुनाव चिह्न जारी किए गए थे.

कांग्रेस के निशान पर रहा विवाद

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  • कई सालों तक कांग्रेस पार्टी कवर करते रहे पत्रकार राशिद किदवई बताते हैं कि पंडित जवाहर लाल नेहरू के दौर में कांग्रेस के पास कंधे पर जुआ रखकर जाते दो बैलों के जोड़े का चुनाव चिह्न था.
  • लेकिन नेहरू के देहांत और लाल बहादुर शास्त्री की विवादास्पद मृत्यु के बाद इंदिरा गांधी ने पार्टी में बड़े बदलाव किए, जिसके चलते पार्टी में मतभिन्नता हो गई और साल 1969 में पार्टी टूट गई.
  • पार्टी के कई सीनियर नेताओं से मिलकर बना एक खेमा कहलाया कांग्रेस(ओ) और दूसरा खेमा, जिसमें इंदिरा गांधी के समर्थक थे, कहलाया कांग्रेस(आर). लेकिन यहां बड़ा विवाद पार्टी के चिह्न को लेकर था और दोनों गुट नेहरू के पार्टी चिह्न पर अपना दावा ठोक रहे थे. बाद में चुनाव आयोग ने इस चिह्न को फ़्रीज़ कर दिया.
  • इसके बाद कांग्रेस(ओ) ने 'सूत कातती महिला' को अपना चुनाव चिह्न बनाया. वहीं इंदिरा गांधी को लंबे विचार विमर्श के बाद 'गाय और बछड़े' को कांग्रेस(आर) का चुनाव चिह्न बनाना पड़ा.
  • बताया जाता है कि जनता में नए चुनाव चिह्न को कांग्रेस(आर) और अपनी पहचान बनाने के लिए इंदिरा गांधी को बहुत मेहनत करनी पड़ी, जिसके लिए इंदिरा को देशव्यापी कैंपेन भी चलाना पड़ा.

1977 में इंमरजेंसी के बाद कराए गए आम चुनाव में कांग्रेस(आर) को बुरी हार का मुंह देखना पड़ा. पार्टी में विरोध के सुर सुनाई देने लगे थे. जगजीवन राम जैसे कई सीनियर नेताओं ने तो पार्टी से इस्तीफा भी दे दिया था.

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Image caption लोग चुनाव चिह्न 'गाय और बछड़ा' की तुलना 'इंदिरा और संजय गांधी' से करने लगे थे.

समाजवादी पार्टी के 1 जनवरी, 2017 को लखनऊ में बुलाए गए आपात आधिवेशन की ही तरह जनवरी, 1978 में भी इंदिरा गांधी ने भी पार्टी कार्यकर्ताओं काकन्वेंशन बुलाया था. इसका आयोजन दिल्ली के संसद मार्ग स्थित मावलंकर हॉल में किया गया था.

इस बारे में सोनिया के जीवनीकार राशिद किदवई लिखते हैं कि यह इंदिरा के लिए सबसे ख़राब दौर था. वो अल्पमत में थीं. लोग उनके चुनाव चिह्न 'गाय और बछड़ा' की तुलना 'इंदिरा और संजय गांधी' से करने लगे थे.

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साल 1980 में कांग्रेस(आर) को तोड़कर कांग्रेस(आई) बनाई गई, जिसमें कांग्रेस से जुड़ा 'आई' इंदिरा के नाम के पहले अक्षर से लिया गया और पार्टी को चुनाव चिह्न के तौर पर 'हाथ' का निशान मिला.

किदवई कहते हैं, "समाजवादी पार्टी के संभावित विघटन में अखिलेश खेमे की हालत इंदिरा गांधी से बहुत बेहतर है. उनके पास बहुमत है. ऐसे में आगामी चुनाव में यूपी की जनता के बीच व्यापक भ्रम पैदा न हो, इसके लिए चुनाव आयोग को समाजवादी पार्टी की 'साइकिल' को ज़ब्त नहीं करना चाहिए."

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Image caption अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप का चुनाव चिह्न भी हाथी है.

बहरहाल, चुनाव आयोग की जानकारी के मुताबिक़ इंदिरा ने चुनाव चिह्न 'हाथ' के लिए समाजवादी पार्टी के चिह्न 'साइकिल' और दलितों की सबसे बड़ी पार्टी कहे जाने वाली बहुजन समाज पार्टी के चिह्न 'हाथी' को नकार दिया था. किदवई ये भी बताते हैं कि इंदिरा गांधी को लगा था कि कांग्रेस के लिए 'हाथी' निशान शुभ नहीं होगा.

लेकिन इसी चुनाव चिह्न 'हाथी' की आज अमरीका में 'रिपब्लिकन सरकार' है. और बसपा के 'हाथी' को भी यूपी के चुनावी दंगल में प्रबल दावेदार माना जा रहा है.

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