बेंगलुरु: अपना हक़ लेने पहुंचीं महिलाएं

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नए साल की रात बेंगलुरु में महिलाओं के साथ कथित दुर्व्यवहार की घटना के ठीक एक सप्ताह बाद, सार्वजनिक स्थानों पर अपना हक लेने के लिए महिलाएं खुल कर सामने आ रही हैं.

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जहां चाहें वहां हम जा सकते हैं: सुमन

महिला संगठनों ने महिला सुरक्षा की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन आयोजित किए, मानव श्रृंखलाएं बनाई गईं, पीड़ितों के लिए न्याय की मांग करते हुए प्लाकार्ड्स भी दिखाए गए.

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लेकिन महिलाओं के छोटे दलों ने नई कोशिशों के ज़रिए समाज को अपना संदेश देने की कोशिश की है और आने वाले दिनों में भी ऐसे कई कार्यक्रम आयोजित किए जाने वाले हैं.

अगर एक कोशिश का नाम है 'मुझे ना छुएं' तो एक अन्य कोशिश महिलाओं से कहती है, "अपनी जगह पर अपना हक लो. कपड़े वैसे पहनो जैसी तुम्हारी इच्छा हो."

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यह सभी विरोध प्रदर्शन इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि एक ही रात में महिलाओं के साथ कथित दुर्व्यवहार की घटना केवल महात्मा गांधी रोड-ब्रिगेड रोड इलाके तक ही सीमित नहीं थी, बल्कि पूर्वी बेंगलुरु के कमनहल्ली इलाके में भी एक लड़की के साथ यौन दुर्व्यवहार की ख़बर आई थी.

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लेकिन ताज़ा मामले में अरेबिक कॉलेज के सामने बुर्क़ा पहने एक लड़की के साथ दुर्व्यवहार किया गया.

'वीमेन इन द पार्क' की संध्या मेंडोंसा ने बीबीसी को बताया, "आज हमारा एकजुट होना सकारात्मक कदम है. जो कुछ भी नए साल की रात हुआ उसके बाद लोगों ने पूछा कि महिलाएं ऐसी जगहों पर जाएं ही क्यों? ऐसे कपड़े पहने ही क्यों? हम कहना चाहते हैं कि महिलााओं को जहां मन चाहें वहां वहां जाने से डरना नहीं चाहिए. महिलाओं को कहीं जाने के लिए किसी की परमिशन की ज़रूरत नहीं."

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'वीमेन इन द पार्क' अभियान की कोशिश है कि महिलाएं जो चाहें वो कर सकें.

कुछ महिलाओं ने विधान सौधा के पास स्थित कुबॉन पार्क में कविताएं सुनाईं तो कुछ ने अपने बैग घास पर रख दिए और वहीं लेट कर अपने मोबाइल पर किताब पढ़ने लगीं. कुछ आपस में बात करने लगीं और कुछ महिलाओं के मुद्दों पर चर्चा करने लगीं.

यहां महिला टैक्सी ड्राइवरों का भी एक दल मौजूद था जिसका नाम था "टैक्सशी".

टैक्सशी की एक सदस्य सुमन ने बताया, "यहां आ कर हम समाज को यह कह रहे हैं कि उस रात जो हुआ हम उसका विरोध करते हैं. हम यह बताना चाहते हैं कि जहां चाहें वहां हम जा सकते हैं और इसके लिए किसी पर निर्भर रहने की ज़रूरत नहीं है."

सुमन पूछती हैं, "हम समाज में सुरक्षित क्यों नहीं हैं? किसी मॉल या किसी पार्टी में जाने के लिए हमें किसी के साथ जाने की ज़रूरत क्यों है? और अगर हम अकेले कहीं जाएं तो हमारे साथ दुर्व्यवहार क्यों होता है?"

टैक्सशी टैक्सी सेवा केवल महिलाओं, बच्चों और बूढ़ों के लिए काम करती है.

सुमन कहती हैं, "हम महिलाओं को ज़्यादा सुरक्षा प्रदान करना चाहते हैं क्योंकि पुरुषों के लिए तो कई टैक्सी सेवाएं हैं. और पुरुषों का बलात्कार तो नहीं होता."

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तो जब टैक्सशी की गाड़ी गुज़रती है तो पुरुषों की क्या प्रतिक्रिया होती है?

सुमन कहती हैं, "पुरुष हमें देखते हैं और हंसते हैं. लेकिन वो लौटते हैं और हमें फिर से देखते हैं और हमें लगता है कि हम उनसे ऊंचे पायदान पर हैं. हम समाज से बस यहीं कह रहे हैं कि महिलाओं का सम्मान किया जाना चाहिए."

मेंडोंसा आश्चर्यचकित हैं कि उन्होंने पार्क में एकजुट होने के बारे में केवल कुछ दोस्तों से ही बात की थी. वो कहती हैं, "मैं यहां आए लोगों में से मात्र 20 प्रतिशत लोगों को ही जानती हूं. बाकी लोग इस बारे में कहीं और से सुनकर यहां आए हैं."

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