खेलने कूदने की उम्र में ही वे बन गए बौद्ध भिक्षु

  • 10 जनवरी 2017
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Image caption थिकसे बौद्ध विहार में कक्षा के बाद आराम करते हुए बौद्ध भिक्षु

भारत प्रशासित कश्मीर के लेह में है 15वीं सदी में बना थिकसे बौद्ध विहार.

हिमालय में 3,000 मीटर की ऊंचाई पर बने में इस विहार में रहने वाले बाल भिक्षुओं की ज़िंदगी कैसी है?

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Image caption नामग्याल त्सेमो विहार के ऊपर लहराते हुए प्रार्थना पताके

यह विहार तिब्बती बौद्ध धर्म के गेलुकपा या 'पीली हैट' संप्रदाय का है. घुमक्कड़ समुदाय के लोगों का यहां डेरा है.

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तिब्बत पर चीन के क़ब्ज़े के बाद वहां के लोगों के सामने अपनी संस्कृति, धर्म और भाषा को बचाए रखने की चुनौतयां आईं.

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तिब्बती बौद्ध धर्म मानने वालों को अपने वतन से दूर भारत में शरण लेनी पड़ी.

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भारत में रहने वाले तिब्बतियों में कई परिवार अपने घर के कम के कम एक बच्चे को धर्म की शिक्षा लेने बौद्ध विहार ज़रूर भेजते हैं.

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तिब्बती बौद्ध धर्म में तस्वीरों, प्रार्थना पताकों, धर्म चक्रों और दूसरे प्रतीकों के माध्यम से उन्हें शिक्षा दी जाती है.

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बौद्ध धर्म में व्यक्ति के निजी आध्यात्मिक विकास पर ज़ोर दिया जाता है. वहां लोग किसी प्रतिमा की पूजा नहीं करते, पर जीवन और प्रकृति के अंदर झांकने की कोशिश करते हैं.

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Image caption धर्म शिक्षा ही नहीं, खेल कूद भी.

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