नोटबंदी: मोदी की पेशी की माँग कर सकती है ये समिति?

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संसद की लोक लेखा समिति के अध्यक्ष, सांसद केवी थॉमस ने रिज़र्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल और वित्त मंत्रालय के तीन सचिवों को नोटबंदी पर जवाब देने के लिए हाज़िर होने का नोटिस भेजा है.

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक़, थॉमस ने कहा है कि लोक लेखा समिति किसी को जवाब देने के लिए बुला सकती है, जिसमें प्रधानमंत्री भी शामिल हैं.

लोक लेखा समिति एक संसदीय समिति होती है जिसका प्रमुख परंपरागत रूप से विपक्ष का नेता होता है, केवी थॉमस कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं.

जानिए क्या है ये लोक लेखा समिति और उसके क्या अधिकार हैं?

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इस समिति का गठन लोकसभा अध्यक्ष करता है, मगर इसमें राज्यसभा के सदस्य भी शामिल किए जाते हैं.

वर्ष 1950 में भारत का संविधान बनने के बाद से लोक लेखा समिति को संसदीय समिति का दर्जा मिला जो सीधे तौर पर लोकसभा अध्यक्ष के अधीन काम करती है.

लोक लेखा समिति में कुल 22 सदस्य होते हैं, जिनमें राज्यसभा के सात सदस्य होते हैं. मगर कोई मंत्री इस समिति का सदस्य नहीं हो सकता है.

वर्ष 1967-68 में पहली बार लोकसभा अध्यक्ष ने सबसे बड़े विपक्षी दल के सांसद को इस समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया जिसके बाद अध्यक्ष की नियुक्ति की यह परंपरा बन गई है.

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समिति का कार्यकाल एक साल का होता है जिसमें शामिल सदस्य संसद में अपने दल के संख्याबल के अनुपात में चुने जाते हैं. मगर सत्ता पक्ष से समिति में शामिल किए जाने वाले सदस्यों के संख्या दस से ज़्यादा नहीं होती है. सत्ता पक्ष के किसी सदस्य को अगर मंत्रिमंडल में शामिल कर लिया जाता है तो फिर वो लोक लेखा समिति का सदस्य नहीं रहता.

बाक़ी के सदस्यों का चयन भी संसद में उनके दल की संख्या के हिसाब से होता है.

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अमूमन भारत के नियन्त्रक एवं महालेखापरीक्षक यानी 'सीएजी' की रिपोर्ट सीधे तौर पर लोक लेखा समिति को भेजी जाती है जिसके बाद समिति अपनी सिफ़ारिशें सरकार को सौंपती है.

समिति की अनुशंसा के आधार पर सरकार कार्यवाई करती है और इससे सम्बंधित 'एक्शन टेकेन रिपोर्ट' संसद में पेश करती है.

समिति सरकार के खर्च के 'लेखा-जोखा' का अवलोकन करती है और 'सीएजी' की रिपोर्ट की समीक्षा के दौरान वो किसी को भी पूछताछ के लिए बुला सकती है. किसी को भी का मतलब है अधिकारी या हर वो व्यक्ति जो समीक्षा में सहयोग कर सकता हो.

वैसे सदन के संचालन के नियमों में कहीं भी यह नहीं कहा गया है कि समिति किसी मंत्री या प्रधानमंत्री को पूछताछ के लिए नहीं बुला सकती है. यह परंपरा रही है कि मंत्रियों को नहीं बुलाया जाता है. मगर कुछ अपवाद ऐसे भी हैं जब समिति के समक्ष प्रधानमंत्री ने खुद ही जाने की पेशकश की थी.

पिछली लोकसभा के दौरान ही देखने को मिला जब प्रमुख विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी की तरफ से नियुक्त लोक लेखा समिति के अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी के सामने खुद तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उपस्थित होने की पेशकश की थी.

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मौजूदा लोक लेखा समिति का गठन पिछले साल 1 मई को हुआ था और इसके मौजूदा अध्यक्ष हैं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता केवी थॉमस. बाक़ी के 21 सदस्यों में राज्यसभा से नरेश अग्रवाल, सत्यव्रत चतुर्वेदी, भुवनेश्वर कलिता, शांताराम नायक, गोयल, संचेती और सुखेन्दु राय हैं.

उसी तरह इसमें लोकसभा से किरीट सोमैय्या, अनुराग ठाकुर, निशिकांत दुबे, जनार्दन सिंह सिग्रीवाल, रीती पाठक, अभिषेक सिंह, शिवकुमार, सी उदासी, सुदीप बंदोपाध्याय, प्रेम सिंह चंदूमाजरा, रिचर्ड हे, गजानन चंद्रकांत कीर्तिकर, भरतुहारी माहताब, नेइफियू रियोह और पी वेणुगोपाल शामिल किए गए हैं.

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