साक्षी महाराज के विवादित बोल, मिल गया नोटिस

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उन्नाव से भारतीय जनता पार्टी के सांसद साक्षी महराज के कथित विवादित बयान पर चुनाव आयोग ने उन्हें नोटिस भेजा है और बुधवार तक उनसे जवाब मांगा है.

साक्षी महाराज ने बीते सात जनवरी को एक समुदाय विशेष को लक्ष्य करते हुए उसे देश की आबादी बढ़ाने के लिए ज़िम्मेदार बताया था.

साक्षी महाराज ने मेरठ में एक धर्म सम्मेलन में कहा था, "देश में आबादी बढ़ाने के लिए हिन्दू ज़िम्मेदार नहीं हैं बल्कि वो लोग ज़िम्मेदार हैं जिनके चार-चार पत्नियां और चालीस बच्चे होते हैं."

उन्होंने कहा था, "हिंदू महिलाओं को अपने धर्म की रक्षा करने के लिए कम से कम चार बच्चे पैदा करने चाहिए."

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राज्य में अगले महीने से विधानसभा चुनाव होने हैं और उसके लिए आचार संहिता लागू है. ऐसे में साक्षी महाराज के इस बयान को प्रशासन ने भी गंभीरता से लिया और उनके ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज की गई है.

साक्षी महाराज के ख़िलाफ़ एफ़आईआर दर्ज

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मंगलवार को चुनाव आयोग ने भी उन्हें एक नोटिस भेजकर कहा है कि शुरुआती तौर पर लगता है कि यह आचार संहिता का उल्‍लंघन है. साक्षी महाराज को नोटिस का जवाब देने के लिए बुधवार सुबह तक का समय दिया गया है.

साक्षी महाराज ने पहली बार ऐसा बयान नहीं दिया है, बल्कि अक़्सर उनके विवादित बयान ही सुर्खियों में आते हैं.

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भारतीय जनता पार्टी ने उनके इस ताज़ा बयान से ख़ुद को अलग ज़रूर किया है, लेकिन निंदा नहीं की है.

पार्टी प्रवक्ता हरीश श्रीवास्तव कहते हैं, "ये उनका निजी बयान है, पार्टी न तो ऐसे किसी बयान का समर्थन करती है और न ही किसी नेता या कार्यकर्ता को ऐसे बयान देने की इजाज़त है."

दरअसल, अक़्सर विवादित बयानों के कारण चर्चा में आने के बावजूद साक्षी महाराज और ऐसे कुछ अन्य नेताओं के ख़िलाफ़ पार्टी ने कभी कोई कार्रवाई नहीं की है, बल्कि नेताओं का निजी बयान कहकर पल्ला झाड़ लेती है.

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लेकिन चुनावी माहौल होने के नाते राजनीतिक दलों ने साक्षी महाराज के इस बयान को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है. कांग्रेस प्रवक्ता वीरेंद्र मदान तो आरोप लगाते हैं कि ऐसे बयान बीजेपी की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हैं.

बहरहाल, साक्षी महाराज के बयान को आयोग ने गंभीरता से लिया है और मेरठ ज़िला प्रशासन से इस बारे में रिपोर्ट भी मांगी है.

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साक्षी महाराज पहले ही कह चुके हैं कि नोटिस अंग्रेज़ी में है इसलिए वो इसका जवाब एक दिन में ही नहीं दे सकते हैं.

लेकिन जानकारों का कहना है कि सवाल नोटिस और उसका जवाब देने का नहीं बल्कि ऐसे बयानों की पुनरावृत्ति न हो ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए.

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