डकैती मामले में आईपीएस अफ़सर को किया गया रिटायर

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छत्तीसगढ़ में 1992 बैच के भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारी राजकुमार देवांगन को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी गई है.

उनके ख़िलाफ़ कथित रुप से डकैती के मामले में लिप्त रहने सहित कई आरोप लगे थे.

राजकुमार देवांगन अभी छत्तीसगढ़ में होमगार्ड के पुलिस महानिरिक्षक थे.

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राज्य के गृहमंत्री रामसेवक पैंकरा ने कहा, ''हम किसी भी दाग़ी अफ़सर को बर्दाश्त नहीं करेंगे. राज्य सरकार ने राजकुमार देवांगन के ख़िलाफ़ जांच के बाद केंद्र सरकार को अनुशंसा की थी. केंद्र सरकार के आदेश के बाद राज्य सरकार ने उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्त कर दिया है."

अखिल भारतीय सेवा के डेथ कम रिटायरमेंट बेनिफिट के तहत राजकुमार देवांगन को 'जनहित' में अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गई है. इसलिये वे पेंशन और अन्य सुविधाओं के भी हकदार नहीं होंगे.

केंद्र के आदेश के अनुसार देवांगन को केवल अगले तीन महीने का वेतन और भत्ता दिया जाएगा.

देवांगन पर आरोप है कि 1998 में जांजगीर-चांपा ज़िले में पुलिस अधीक्षक के पद पर रहते हुये वे 65 लाख रुपये की डकैती के एक मामले में शामिल थे.

इस आरोप के बाद उन्हें निलंबित कर दिया गया था. लेकिन विभागीय जांच लंबित रहने के कारण बाद में उन्हें सेवा में बहाल कर दिया गया.

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पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार बोस्निया में शांति सेना में रहते हुए भी उन पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे.

छत्तीसगढ़ में उनके बैच के दूसरे अधिकारियों को अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक बना दिया गया था लेकिन इन आरोपों के कारण उन्हें पदोन्नति नहीं दी गई थी.

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