'मोदी ने खादी की बिक्री बढ़ाई'

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गुरुवार को भारत के सोशल मीडिया पर खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) के कैलेंडर पर प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर की काफी चर्चा हुई. सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इसकी आलोचना की और कहा कि मोदी ने बापू की जगह ले ली.

केवीआईसी के कैलेंडर और डायरी में साल 2017 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जगह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर छापी गई है.

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इस मामले पर विवाद के बाद भाजपा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कहा कि इस मुद्दे पर चर्चा बेबुनियाद है.

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भाजपा के प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा, "गांधी जी की जगह कोई नहीं ले सकता और कोई ऐसा करने का बारे में नहीं सोच रहा है. वो हमारे दिल में हैं, हमारों काम में उनके आदर्श ही दिखते हैं. ये उन्हीं के सिद्धांत हैं जो हम एक देश हैं."

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संबित पात्रा ने कहा, "जो लोग कहते हैं कि केवीआईसी के कैलेंडर पर गांधी की ही तस्वीर होनी चाहिए, उन्हें ये जानना चाहिए कि ऐसा कोई नियम नहीं है. साल 1996, 2002, 2005, 2011, 2012 और 2013 में केवीआईसी कैलेंडर पर महात्मा गांधी की तस्वीर नहीं थी."

उन्होंने कहा, "कांग्रेस के कार्यकाल के दौरान खादी की बिक्री मार 2-7 फीसदी थी, लेकिन भाजपा सरकार के सत्ता में आने के बाद ये बिक्री करीब 35 फीसदी तक बढ़ी है. क्या इससे गांधी जी ख़ुश नहीं होंगे."

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संबित पात्रा ने कहा कि इसमें पीएम मोदी के 'मन की बात' का योगदान है क्योंकि उन्होंने लोगों से खादी अपनाने के लिए कहा था.

उन्होंने कांग्रेस पर आरोप लगाया, "कांग्रेस को गांधी की तस्वीर केवल नोट पर अच्छी लगती है जो वो अपने पॉकेट में रखते हैं और जो उन्होंने देश की जनता से लूटा."

भाजपा की कॉन्फ्रेस के बाद कांग्रेस भी इस मुद्दे पर मीडिया से मुखातिब हुई.

कांग्रेस के प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, "खादी की सोच, खादी का प्रचार और खादी का संबंध, चरखा इस पर महात्मा गाँधी के अलावा किसी का अधिकार नहीं हो सकता."

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Image caption कांग्रेस का ट्वीट

अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा, "जैसा कि सरकार का कहना है, पहले भी गांधी की जगह अन्य तस्वीरों का उपयोग किया है, लेकिन उसकी जगह आम आदमी, चरखा और हल था लेकिन तब के प्रधानमंत्री का चेहरा कभी नहीं रहा."

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सिंघवी ने कहा, "आरएसएस ने गांधी जी को उनके विचारों के लिए मारा. अब मोदी जी ने कैलेंडर और डायरी से गांधी को हटा कर अपनी तस्वीर लगा ली है. कुछ-कुछ अहंकार जैसा ये जुनून प्रधानमंत्री की पहचान बनता जा रहा है."

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