मोदी की तस्वीर पर क्या कहते हैं गांधी के प्रपौत्र?

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खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) के कैलेंडर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर को लेकर बहस जारी है.

कैलेंडर पर प्रधानमंत्री मोदी की चरखे के साथ तस्वीर है.

मोदी की तस्वीर चरखे के साथ महात्मा गांधी की तस्वीर की याद दिलाती है. राजनीतिक गलियारों से लेकर सोशल मीडिया तक इसी को लेकर बहस छिड़ी हुई है.

महात्मा गांधी के प्रपौत्र तुषार गांधी इस बहस को अलग नजरिए से देखते हैं.

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तुषार गांधी ने बीबीसी के साथ ख़ास बातचीत में कहा कि महात्मा गांधी और उनके प्रतीकों का इस्तेमाल राजनीतिक 'मजबूरी' है.

उन्होंने कहा, " ये एक मजबूरी है. जब भी कोई प्रतिष्ठा की बात आती है. जब भी किसी चीज के एंडोर्समेंट (अनुमोदन) की जरुरत होती है तब किसी न किसी स्वरूप में बापू के ही किसी प्रतीक को एक्सप्लॉइट (इस्तेमाल) करना पड़ता है. "

तुषार गांधी कहते हैं कि सैद्धांतिक रुप में तो वो (भारतीय जनता पार्टी)बापू को मानते नहीं हैं. वो मान भी चुके हैं कि उनकी विचारधारा विपरीत है.

तुषार गांधी की राय में ये एक ऐसी कोशिश है कि विचार न सही तो जो चीज विश्वभर में बापू के साथ एकदम जुड़ी हो, उसी को अपने साथ जोड़ दें.

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विवाद शुरू होने के बाद भारतीय जनता पार्टी सफाई दे चुकी है.

बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने बताया कि साल 1996, 2002, 2005, 2011, 2012 और 2013 में केवीआईसी कैलेंडर पर महात्मा गांधी की तस्वीर नहीं थी.

इस दलील पर तुषार गांधी कहते हैं, " ये सब आफ्टर थॉट है. बात करने के बाद उसे प्रमाणित करने की कोशिश है. ऐसा पहले कभी नहीं हुआ था. जिस विश्व विख्यात मुद्रा में बापू की तस्वीर है, वैसी ही एक तस्वीर बनाकर उस पहचान को हड़पने की कोशिश की गई है."

तुषार गांधी की राय है कि ऐसी कोशिश की मंशा ये हो सकती है कि देखें कि लोगों की प्रतिक्रिया कैसी आती है.

वो ये भी कहते हैं कि दुनिया में बापू को लेकर जो मान्यता है, ये उसी तरह खुद को विश्व पुरुष दिखाने की कोशिश हो सकती है.

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तुषार गांधी कहते हैं कि उन्हें ऐसी कोशिश को लेकर कोई गिला-शिकवा नहीं है.

तुषार कहते हैं, "वो प्रधानमंत्री हैं. ये मंत्रालय उनकी सरकार के अधीन आता है. उनको ये करने का अधिकार है. इसमें सिर्फ एक सचाई होना जरूरी है कि बापू बहुत साल प्रतीक बने रहे. अब हम चाहते हैं कि प्रधानमंत्री प्रतीक बनें. जब ये बताने की कोशिश होती है कि किसी अफसर ने गलती कर दी. हमने कोई आदेश नहीं दिया था. ये झूठ का सहारा विडंबना बन जाता है."

केंद्र सरकार के कई कार्यक्रमों में महात्मा गांधी के प्रतीकों का इस्तेमाल किया गया है. 'स्वच्छ भारत अभियान' का सिंबल महात्मा गांधी का चश्मा है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' में खादी इस्तेमाल करने की अपील की है.

वहीं, भारतीय जनता पार्टी का दावा है कि मोदी सरकार के कार्यकाल में खादी की बिक्री बढ़ी है.

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लेकिन तुषार गांधी इस दावे को सही नहीं मानते. वो कहते हैं कि खादी की बिक्री नहीं बढ़ी है.

तुषार गांधी के मुताबिक, "खादी की बिक्री बढ़ती तो पीढ़ियों से खादी का पारंपरिक काम करने वालों की स्थिति में फर्क पड़ता. केवीआईसी ने जो पॉली वस्त्र बनाया है, खादी का विकल्प, शायद उसकी बिक्री बढ़ी होगी."

वो कहते हैं कि बापू की खादी तैयार करने वाले कारीगरों की स्थिति पर कोई फर्क दिखाई नहीं देता है.

कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर तीखे हमले कर रही है लेकिन तुषार गांधी कहते हैं कि कांग्रेस को ऐसा करने का कोई अधिकार नहीं है.

वो कहते हैं, "कांग्रेस ने भी अपने कार्यकाल में बापू की खादी को बढ़ावा देने की कोशिश नहीं की."

वो कहते हैं कि बापू और खादी को लेकर राजनीति का सिलसिला बड़ा पुराना है.

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